कलम की धार सदा ही जवान होती है। जिधर उठी है उधर ही कमान होती है। कहीं पर न्याय बनी तो कहीं शोले भड़के, कहीं पर प्रीत बनी तो दिलोजान होती है। यह छंद पढ़कर कवि रमेशचंद्र शर्मा ने कलमकारों की गरिमा को ऊपर उठाया। मौका था रविवार को महोत्सव में आयोजित स्थानीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान हास्य, श्रंगार, ओज व देश भक्ति के रंग में महोत्सव पंडाल सराबोर हुआ।
सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव व आयोजक मंडल के अध्यक्ष पं. ओमनारायन चतुर्वेदी मंजुल ने किया। कवि सम्मेलन में स्थानीय कवियों और साहित्कारों ने उत्कृष्ट रचनाएं प्रस्तुत की। इस दौरान अयाज अहमद अयाज ने मां शारदे की वंदना प्रस्तुत की।
इसके बाद शुरू हुए काव्य पाठ में ओज के कवि रामस्वरूप दीक्षित ने जाने कितना खून बहाकर ये आजादी पाई है, देश की खातिर जेल में जाकर भी झेली तनहाई है देश भक्ति गीत गाकर मंच को वीर रस से डुबो दिया। कवि अमर सिंह भदौरिया ने सौ मारो तब गिनो एक, जाके सिर पैधारो पन्हैया, जमाना हांजू, हांजू को नहिहा...।
साहित्यकार राज कुमार शुक्ला ने कभी भी मां का कर्जा जिंदगी में कम नही होता गीत गाकर मातृ प्रेम की अलख जगाई। तो वहीं कविवर डा. गुर प्रताप गुर ने दीप दामन का जगमगाओ, रोशनी मिल जाएगी मुक्तक पढ़कर जीवन में आशाओं के दीप जलाए रखने को प्रेरित किया। साहित्यकार हरिशंकर मिश्र ने उसकी इनायत से हुए जर्रे से आफताब, उनको गुमान है कि भगवान हो गए शेर पढ़ा।
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे पं. ओम नारायन चतुर्वेदी मंजुल ने हम हवन हो सके, मातृ भू के लिए, हम तिमिर छय करें वह हमें शक्ति दो वंदना प्रस्तुत की। कवि अजय शुक्ला अंजाम ने ओज रस से समावेश मेरा संकल्प है भारत की सभी जय बोले और चेलेंज है बुलवा के तुम्हे छोडूंगा गीत गाया।
महोत्सव पंडाल में कवि सम्मेलन के संयोजक व संचालक कर रहे गोविंद द्विवेदी ने हर एक व्यवधान के बदले नया अभियान लिखता हूं, हमेशा लक्ष्य पै धरि वान पर संधान लिखता हूं कविता का पाठ किया। वहीं कवि अनुरूद्ध त्रिपाठी ने हम तो अमृत का घट पी गए, चैन से तुमने सपने संजोए गरल के लिए गीत प्रस्तुत किया।
अयाज अहमद अयाज का देश भक्ति से ओत-प्रोत गीत करें हम सजदा जमी पर, करो तुम वंदे मातरम गीत गाकर महोत्सव पंडाल को देश भक्ति के रंग में रंग दिया। वहीं हास्य कवि प्रकाश चंद्र मिश्र औगढ़ ने अपनी रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं को हंसी के ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। साहित्यकारों का माल्यार्पण व उन्हें अंग वस्त्र पहनाकर एडीएम एके सिंह ने सम्मानित किया।