औरैया। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) के पीठासीन अधिकारी अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र की अदालत ने फैसला सुनाते हुए बाल अपचारी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड की ओर से पारित पहले के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नाबालिग की जमानत खारिज कर दी गई थी।
मामला एरवाकटरा थाना क्षेत्र का है, जहां 29 वर्षीय विधवा महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था। महिला का आरोप था कि उसके पति की मृत्यु के बाद बाल अपचारी ने नौकरी लगवाने के नाम पर 15 हजार रुपये ऐंठ लिए और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने तीन माह तक उसका शारीरिक शोषण किया। आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाए और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे फतेहगढ़ राजकीय संप्रेक्षण गृह भेजा था।
सुनवाई के दौरान बाल अपचारी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि किशोर की उम्र मात्र 15 वर्ष 2 माह है और उसने इसी वर्ष 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। वहीं वादिनी 29 वर्ष की परिपक्व महिला है। कोर्ट ने साक्ष्यों का अवलोकन करते हुए कहा कि एक 29 वर्षीय महिला को 15 साल का बाल अपचारी झांसा देकर बहला ले, यह असंभव प्रतीत होता है तथा सहमति से संबंध बनने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड की उस धारणा को काल्पनिक करार दिया, जिसमें कहा गया था कि जमानत मिलने से किशोर का नैतिक और मनोवैज्ञानिक पतन हो जाएगा। विशेष न्यायाधीश ने पिता की ओर से 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और दो जमानतगीरों की शर्त पर बालक अपचारी को उसके पिता की सुपुर्दगी में रिहा करने का आदेश जारी किया।