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Auraiya News: बदबू के मारे सीलन भरे घरों में ठहरना मुश्किल, बीमार हो रहे लोग

Wed, 06 Aug 2025 12:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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सिकरोड़ी गांव में घर पर मौजूद महिलाएं। - फोटो : सिकरोड़ी गांव में घर पर मौजूद महिलाएं।
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अजीतमल। कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के बाद करीब एक हफ्ते से यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा था। अब जलस्तर हर 24 घंटे में दो मीटर तक कम हो रहा है।
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ऐसे में बाढ़ से बेघर हुए सिकरोड़ी गांव के लोग अब अपने गांव पहुंच गए हैं, लेकिन अब सिकरोड़ी समेत बड़ैरा, गौहानी कलां और जाजपुर गांव के सीलन भरे घरों में फैली गंदगी से लोग परेशान हैं। यही नहीं, चर्मरोग, उलटी, पेचिस, खुजली और बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं।
मंगलवार को यमुना का जलस्तर सुबह 109.4 मीटर दर्ज किया गया। अब पानी खतरे के निशान 113 मीटर से काफी कम है। वैसे तो अभी तक लोग बाढ़ से परेशान थे, लेकिन अब गंदगी और बदबू से लोगों का घरों में घुसना मुश्किल हो रहा है।
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हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें वहां ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर रही हैं, लेकिन घरों में भीतर तक फैला कीचड़, पानी में भीगा खराब सामान और सीलन लोगों को बीमार कर रहा। गांव में रोजाना 300 से अधिक मरीज निकल रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की चार टीमें चिकित्सीय परीक्षण के बाद लोगों को दवा बांट रही हैं। ब्लॉक क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव सिकरोड़ी, बड़ैरा, गौहानी कलां, जाजपुर आदि में चर्मरोग, दस्त, खुजली और बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं।
यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अजीतमल से चार टीमें रवाना की गई हैं। सबसे ज्यादा मरीज खुजली व चर्मरोग के निकल रहे है। मंगलवार को खुजली के 86 मरीज, बुखार के 16 मरीज, दस्त के 18 मरीज, पेचिस के 13, चर्मरोग के 86 व अन्य बीमारियों के 98 मरीजों का उपचार किया गया।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अशोक राय ने बताया कि बाढ़ का पानी कम होने पर बीमारियां बढ़ी हैं। सबसे ज्यादा चर्म रोग के मामले हैं। वहीं दूषित पानी पीने से उलटी व दस्त के भी मरीज बढ़े हैं। ब्लीचिंग का छिड़काव कराया जा रहा है।



खाना बनाने को नहीं बचा चूल्हा, बाढ़ में बह गई गृहस्थी
सिकरोड़ी निवासी बिट्टन देवी ने बताया कि बाढ़ आने के बाद वह अपने परिवार के साथ बाढ़ चौकी क्षेत्र में पहुंच गई थीं, लेकिन घर का सामान नहीं निकाल पाई थीं। सामान बाढ़ में बह गया है। अब फिर से गृहस्थी बनानी पड़ेगी।

सिकरोड़ी निवासी जयवीर ने बताया कि घर पर खाने के लिए गल्ला रखा था। बाढ़ का पानी आने पर वह नहीं निकाल पाए। जिसके चलते गल्ला पानी में खराब हो गया है। अब पूरे साल खाने-पीने के अनाज का भी संकट रहेगा।

सिकरोड़ी निवासी दयाशंकर ने बताया कि बाढ़ में उसकी फसल नष्ट हो गई है। सरकार द्वारा भी मुआवजा न के बराबर दिया जाता है। जिससे पूरे साल गुजारा नहीं हो सकता है। इसलिए अब बाहर जाकर मजदूरी करनी पड़ेगी। तभी पूरे साल गुजारा हो सकेगा।
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मीरा देवी ने बताया कि बाढ़ का पानी कम होने पर घर पर लौटकर आए तो देखा कि घर की हालत खराब हो गए हैं। खाना बनाने वाला चूल्हा भी पानी में बह गया है। ईंधन-लकड़ी सब कुछ पानी में गीला पड़ा है। खाना बनाने का भी संकट है।
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