सुविधा शुल्क लेकर बिजली बिलों में किए गए करोड़ों रुपये के हेरफेर के मामले में एक नया पेंच सामने आया है। मामले में जहां एक्सईएन ने करोड़ों रुपये के हेरफेर वाले बिलों को दोबारा कंप्यूटर में अपलोड किया है। वहीं एमडी स्तर से मांगी गई रिपोर्ट में एचसीएल कंपनी ने एक साल के डाटा में कौड़ियों का हेरफेर ही दिखाया है। मामला उलझता देख एक सप्ताह पहले मंडल स्तर की जांच टीम गठित की गई थी। गठित टीम के समय से रिपोर्ट न देने पर टीम के अधिकारियों को बदल दिया गया है। यह टीम 30 नवंबर को जनपद पहुंचकर अभिलेखों की जांच करेगी।
जिले के बिजली विभाग में सैकड़ों घरेलू बिलों में करोड़ों रुपये के हेरफेर किए जाने के मामले में पूर्व में गठित मंडलीय जांच टीम में बदलाव किया गया है। इसके चलते अभी जांच पूरी नहीं हो पाई है। वहीं नई गठित की गई टीम 30 नवंबर को जनपद पहुंचकर मामले की हकीकत जानने को दस्तावेजों को खंगालेगी।
खास बात यह है कि एक ओर जहां एक्सईएन पंकज शर्मा ने करोड़ों रुपये के सैंकड़ों बिल कंप्यूटर में दोबारा अपलोड किए जाने की बात कही है। वहीं एमडी प्रभू नारायण सिंह को एचसीएल कंपनी से मिली सूची में सिर्फ सात हजार रुपये का हेरफेर बताया जा रहा है। पूरे प्रकरण में अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट हो पाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर एमडी को गुमराह क्यों किया गया।
बिजली बिलों के हेरफेर के मामले में एक्सईएन द्वारा सैंकड़ों बिलों को रिवर्ट किए जाने का ब्यौरा तलब किया जाएगा। आखिर बिलों को रिवर्ट करने की स्थिति ही क्यों आई। वहीं एमडी स्तर पर दी गई जानकारी में कुछ तथ्य छिपते देख जांच टीम का गठन किया गया है। सोमवार को टीम औरैया पहुंचेगी। पूरी स्थिति की जानकारी करके एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
धनीराम मौर्य, चीफ इंजीनियर, कानपुर मंडल