तीन तहसीलों में 25 अवैध कालोनियां चिह्नित, गरजेगा बुलडोजर
फोटो-20-जिला पंचायत कार्यालय। संवाद
- बिना अनुमति और नक्शा पास कराए काटे जा रहे प्लॉटों पर कार्रवाई की तैयारी
- जिला पंचायत ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब, सदर क्षेत्र में दो कालोनियां की जा चुकीं ध्वस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में बिना जिला पंचायत की अनुमति और नक्शा पास कराए काटी जा रहीं अवैध कालोनियों पर प्रशासन की नजरें टेढ़ी हुई हैं। जिला पंचायत ने तीन तहसीलों में ऐसी 25 अवैध कालोनियों को चिह्नित किया है जहां धड़ल्ले से प्लाटिंग की जा रही है। इन कालोनियों को काटने वालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इससे पूर्व जिला पंचायत दो अवैध कालोनियों का ध्वस्तीकरण कर यह साफ कर चुका है कि कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित नहीं रहने वाली है।
शहर और कस्बों में खेतों में प्लॉटिंग कर अवैध कालोनियां बसाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। नियमानुसार आवासीय योजना के लिए जिला पंचायत से उसका नक्शा पास कराना और अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके बावजूद बिना अनुमति और नक्शा पास कराए धड़ल्ले से ग्रामीण अंचल तक में अवैध कालोनियां काटी जा रही हैं। अब इन पर जिला पंचायत ने नकेल कसनी शुरू की है। ऐसे ही 25 निर्माण स्थलों (साइट) को जिला पंचायत प्रशासन ने चिह्नित किया है। इन सभी को नोटिस जारी कर अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई है। फफूंद और सेहुद में दो प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई भी हो चुकी है।
अवैध कालोनियों में प्लाॅट खरीदने वालों की मुसीबत
अवैध रूप से प्लॉटिंग करने वाले केवल अपनी जेबें भरने पर ध्यान दे रहे हैं उन्हें नियम और कानून से कोई मतलब नहीं है। दूसरी ओर इसका खामियाजा प्लॉट खरीदने वालों को भुगतना पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई के लिए जो 25 अवैध कालोनियां चिह्नित की गई हैं उनमें 100 से अधिक प्लॉटों की बिक्री हो चुकी है। ऐसे में जिन लोगों ने अपनी खून पसीने की कमाई से यहां प्लॉट खरीदे हैं उनके लिए भी मुसीबत खड़ी हो सकती है। 28 मार्च को जिला पंचायत कार्यालय में आयोजित बैठक में भी अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा उठा था। इसमें जनप्रतिनिधियों ने अवैध प्लॉटिंगों पर शुरू से ही शिकंजा कसने की बात कही थी। ताकि बाद में ऐसे प्लॉट खरीदने वालों की मेहनत की कमाई मिट्टी में न मिल जाए।
इसलिए नहीं पास कराते नक्शा
अवैध रूप से कालोनी काटने वाले सरकारी शुल्क और सामुदायिक सुविधाओं के लिए जमीन छोड़ने की बाध्यता से बचने के लिए जिला पंचायत से न तो अनुमति लेते हैं और न ही नक्शा पास कराते हैं। कृषि योग्य जमीन पर आवासीय योजना के लिए लैंडयूज बदलने का शुल्क देना पड़ता है। योजना में सड़क, बिजली, पार्क, सीवर आदि की सुविधाओं का प्रावधान करना होता है। इन सबसे बचने के लिए अवैध कालोनी बसाने वाले कम कीमत के प्लाॅट बेचकर निकल जाते हैं और इसका खामियाजा खरीदार को भुगतना पड़ता है।
बिना जानकारी न खरीदें प्लॉट
जिला पंचायत ने लोगों से भी अपील की है कि वह किसी भी अवैध कालोनी में प्लॉट खरीदने से पहले जानकारी जरूर कर लें। इसके लिए जिला पंचायत कार्यालय से पता किया जा सकता है कि उक्त प्लॉटिंग की अनुमति ली गई है या नहीं, नक्शा स्वीकृत हुआ है या नहीं। बाद में कार्रवाई होने पर वह स्वयं ही जिम्मेदार होंगे। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस नुकसान का जिम्मा विक्रेता और खरीदार का होगा।