चंबल सेंचुरी में मछलियां पकड़ते मछुआरे।
- फोटो : चंबल सेंचुरी में मछलियां पकड़ते मछुआरे।
अजीतमल (औरैया)। यमुना तटवर्ती जुहीखा से सटे भरेह में प्रतिबंधित चंबल सेंचुरी में अवैध रूप से मछली पकड़ने का धंधा हो रहा है। इससे जलचर घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के अंडों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
चंबल सेंचुरी क्षेत्र में रेहू, नरेन चायना, रीठा, टेंगन, कतरा आदि प्रजाति की मछली के अलावा दुर्लभ प्रजाति की डॉल्फिन भी पाई जाती है। माफिया के गठजोड़ से मछुआरे बड़े पैमाने पर मछली पकड़ने का अवैध कारोबार कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि मछली पकड़ कर सुखा लेते हैं। इसके बाद बोरों में भरकर रात में वाहनों से महानगरों के लिए सप्लाई करते हैं।
मछली सुखा रहे लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इससे वजन कम हो जाता है। सूखी मछली पाउडर व अन्य दवा के काम आती है। उन्हें सिर्फ मजदूरी मिलती है। कमाई ठेकेदारों को होती है। तहसीलदार अजीतमल अविनाश कुमार ने बताया कि सेंचुरी क्षेत्र की जानकारी करके कार्रवाई की जाएगी ।
क्या है चंबल सेंचुरी
मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व राजस्थान में चंबल सेंचुरी है। इसमें बहुआ, डॉल्फिन, मगरमच्छ व घड़ियालों के लिए 2100 वर्ग किमी. का इलाका संरक्षित किया गया है। इस इलाके में मछली का शिकार प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर तीन वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। इनकी रोकथाम के लिए पेट्रोलिंग भी कराई जाती है।