सोमवार रात हुए हादसे में निर्माणाधीन इंदिरा आवास की दीवार गिरने के बाद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक मिलीभगत से इंदिरा आवास की किश्तें दिलाने के नाम पर बड़े भ्रष्टाचार की पोल खुलती नजर आई। इंदिरा आवास के लाभार्थियों ने आरोप लगाया कि किश्तों का रुपया आता जरूर उनके खातों में है। परंतु बाद में इंदिरा आवास दिलाने वाले जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक कर्मचारी कमीशन के नाम पर 40 फीसदी धनराशि ले लेते हैं।
बले का पुर्वा निवासी रविंद्र पुत्र लालाराम ने आरोप लगाया कि इंदिरा आवास दिलाए जाने के नाम पर जनप्रतिनिधि व ब्लाक के कर्मचारी 40 फीसदी कमीशन ले लेते हैं। पहली किश्त में उनके खाते में 35 हजार रुपये फरवरी महीने में आया था। परंतु उनके हाथ में मात्र 22 हजार रुपये ही लगा। इसके कारण मजदूरी करने वाले रविंद्र इस धनराशि से इंदिरा आवास की नींव एवं एक दीवार ही बनवा सका। रविंद्र का कहना है कि आज यदि उसे पूरा रुपया मिला होता तो कम से कम चारों दीवारें बनीं होतीं। सोमवार को बिना किसी सहारे के खड़ी दीवार न गिरती।
इधर, अपने बेटे को खो चुके अमिंत उर्फ सौरभ के पिता प्रताप सिंह कठेरिया को भी इंदिरा आवास मिला है। उसका भी कहना है कि उसको भी पहली किश्त के रूप में 35 हजार रुपये मिले। परंतु उसके हाथ में 22 हजार रुपये ही आए। बताया कि उसने भी इंदिरा आवास की किश्त से मात्र एक ही दीवार बना पाई है। सहार ब्लाक के प्रभारी बीडीओ केएल सोनकर से जब इस बावत बात की गई तो उन्होंने किसी ब्लाक कर्मी के इस प्रकार से कमीशन के खेल में शामिल होने से साफ इंकार किया।
कुछ यूं होता है खेल...
बताते हैं कि इंदिरा आवास के नाम पर कुल 70 हजार रुपये आता है। पहली किश्त में 35 हजार रुपये मिलते हैं। दूसरी किश्त पाने के लिए जरूरी होता है कि दीवार लेंटर तक पहुंच जाए। लेंटर डालने को दीवार के ऊपरी हिस्से में शटरिंग आदि लगाने के लिए होल दिखाने जरुरी हैं। इसकी फोटो खींचकर फोटो विभागीय वेबसाइट पर लोड करनी होती है। इसका तोड़ कमीशन खोर लोगों ने निकाल लिया। पहली किश्त में 40 फीसदी तक कमीशन ले लेते हैं और लाभार्थी से आवास की एक दीवाल बना लेने के लिए कहते हैं। दीवाल बनने के बाद सामने से फोटो खींचकर वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं। ताकि दूसरी किश्त मिल जाए। यही हाल ग्राम पुर्वा बले में देखने को मिला। लाभार्थी रविंद्र एवं प्रताप सिंह की एक ही दीवार बनी। तेज आंधी में रविंद्र के निर्माणाधीन इंदिरा आवास की दीवाल भरभरा कर गिर गई।