पति की आज्ञा पालन ही विवाहिता का धर्म और कर्म होना चाहिए। सती ने पति की इच्छा के विरुद्ध अपने पिता के घर जाने का साहस किया था, जिसका परिणाम सती को चुकाना पड़ा था। यह बात कथा वाचक पंडित पवन कृष्ण ने भक्तों के बीच कही।
शनिवार को सेंगन पुट्ठा के हनुमान टेकरी में चल रही श्रीमद भागवत कथा के दौरान पंडित पवन कृष्ण ने भक्तों से कहा कि पत्नी को कभी पति की आज्ञा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। पति की उपेक्षा करने वाली स्त्री का कभी भला नहीं हो सकता है।
माता सती भगवान शिव की आज्ञा के बगैर अपने पिता के यज्ञ में शामिल होने गईं थी, जहां पर राजा दक्ष ने अपने सभी नाते रिश्तेदारों को बुलाया था, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया था। सभी के सामने पति का अपमान होते देख सती से सहन न हुआ और वह अपने पिता के आहूत यज्ञ में ही समाप्त हो गई।
उन्होंने कहा कि शादी के बाद पत्नी के लिए उसका परिवार पति का घर होता है। पति परमेश्वर होता है। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे। आयोजकों ने धर्म प्रेमियों से भागवत कथा में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित किए जाने की मांग की है।