स्थानीय रामकुमार भारतीय ज्ञान देवी महाविद्यालय में मंगलवार को काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें हास्य रस, वीर रस, श्रंगार रस के कवियों ने अपनी रचनाएं पेश की। मंगलवार को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रबंधक मुकेश भारतीय ने माँ सरस्वती के चित्र पर फूल माला चढ़ाए और दीप प्रज्जवलित किए।मुख्य अतिथि के सम्मान में छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्सुत किया।
बीएससी के छात्र मोह्म्मद मुस्तकीम ने देश के अमन चैन पर अपनी रचना पेश की.. आग धुंआ नफरत फैली जी है शैतान की, यह कैसी तस्वीर बना दी तुमने हिंदुस्तान की। बीटीसी के छात्र आशीष बाजपेयी ने कहा कि शमा ए वतन की आन पर जब कुर्बान पतंगा हो, होठों पर गंगा हो हाथों में तिरंगा हो। युवा कवि छात्र बकार आलम ने अपनी नज्म पेश की ..न जख्म भरे दिल के ना शराब सहारा हुई, न वो वापस लौटी कहा कि न मोहब्बत दोबारा हुई।
बी.ए. की छात्रा दामिनी शर्मा ने अपनी कविता में कहा कि ‘‘ओंलिया मेरे रस्ता दिखा, गिरते को उठा। बी.एस.सी. के छात्र मुजस्सम खान ने अपनी कविता में कहा कि ‘‘सोने की इस चिडियां के अब अरमा बिखर गये। नफरत पाई कही पर हिंसा देख देखकर सहम गये। बी.एस.सी. की छात्रा आरती ने कहा कि ‘‘कभी स्कूल जाने से डरते थे आज अकेले दुनिया घूम लेते हैं।
प्रोफेसर कल्पना अवस्थी ने कहा कि ‘‘जंगल जंगल ढूढं रहा मृग अपनी कस्तूरी को। कितना मुश्किल है तय करना खुद से खुद की दूरी को। इसके अलावा प्रबंधक मुकेश भारतीय ने एक कविता सुनाकर छात्र-छात्राओं का हौंसला अफजाई किया। स्कूल के अन्य प्रोफेसरों ने अपनी अपनी कवितायें पेश की। काव्य गोष्ठी के दौरान अच्छी कविता प्रस्तुत करने पर छात्र मुस्तकीम, बकार आलम, आरती, मुजस्सम खान को सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रबन्धक मुकेश भारतीय ने लोगों का आभार व्यक्त किया।