औरैया। ठंड बढ़ने के साथ ही हृदय रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
जिला अस्पताल में रोजाना चार से पांच मरीज सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन इलाज की समुचित व्यवस्था न होने से मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है। बीते दिन ही एक मरीज की हार्ट अटैक से मौत हुई थी।
सर्दी के मौसम में हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में न तो हृदय रोग विशेषज्ञ तैनात हैं और न ही आवश्यक जांच व उपचार की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। ऐसे में अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
अस्पताल में प्रतिदिन चार से पांच मरीज सीने में दर्द की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इनमें से कई मरीज गंभीर स्थिति में होते हैं, जिन्हें तुरंत उच्च स्तरीय इलाज की जरूरत होती है। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें कानपुर या चिचौली मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया जाता है। मरीजों और उनके परिजनों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, इससे समय पर इलाज में देर हो रही है। उधर, शनिवार को शहर के ब्रह्मनगर निवासी अखिलेश शुक्ला (52) की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
नियमित दवा, ठंड से बचाव जरूरी: डॉ. प्रियेश
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. प्रियेश प्रताप सिंह ने बताया कि सर्दी के मौसम में हृदय रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। नियमित दवा, ठंड से बचाव और समय पर जांच बेहद जरूरी है। सीने में दर्द, सांस फूलना या घबराहट जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने की व्यवस्था है। मरीज को सामान्य स्थिति में लाकर रेफर कर दिया जाता है, ताकि उसका बेहतर उपचार हो सके।
- डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, सीएमएस, जिला अस्पताल