औरैैया। कोविड-19 के इस मुश्किल दौर में बच्चों की कुपोषण दर को कम करने व उनके स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने अहम कदम उठाया है। कोरोना महामारी के दौरान शिशु स्वास्थ्य के लिए काम कर रही सभी पोषण संस्थाओं और संगठनों को निर्देश दिए गए हैं कि वह किसी भी प्रकार का डिब्बा बंद शिशु आहार न बांटे। यह जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद अवस्थी ने दी।
शरद अवस्थी का कहना है कि छह माह पूर्ण होने पर मां के दूध के साथ ऊपरी आहार व दो साल तक स्तनपान शिशु का सर्वोत्तम आहार है। इसी को देखते हुए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में लागू आईएमएस एक्ट, 2003 का सख्ती से पालन किया जाए।
उधर, बालरोग विशेषज्ञ डॉ.जीपी चौधरी का कहना है कि मां का दूध बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें डायरिया, निमोनिया व कुपोषण जैसे रोगों से भी बचाता है। वहीं, बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद दूध में मां के दूध के मुकाबले कम पोषक तत्व होते हैं।