औरैया। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले के 1789 ग्रामीण आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक महीने की दस तारीख को ग्रामीण पोषण दिवस मनाया जाएगा। राज्य पोषण मिशन की महानिदेशक मोनिका एस गर्ग की ओर से हाल ही में प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को इस आशय के निर्देश भेजे गए हैं। इसके तहत गर्भावस्था से लेकर दो वर्ष तक की आयु वाले बच्चों के परिवारों को पोषण व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम अधिकारी शरद अवस्थी ने बताया कि ग्रामीण पोषण दिवस के दिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता साग-सब्जियों के मिश्रण से पौष्टिक व्यंजन बनाने के बारे में जानकारी देंगे। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई पूरक पोषक आहार पुस्तिका के माध्यम से पौष्टिक आहार कैसे बनाएं, पौष्टिक आहार की मात्रा व गुणवत्ता के बारे में कुपोषित बच्चों के परिवारों को जागरूक किया जाएगा।
इसके अलावा स्वस्थ शिशु व स्वस्थ मां प्रतियोगिता के साथ आठ माह पूर्ण कर चुकी गर्भवती व छह माह से ऊपर वाली धात्री माताओं के लिए मानक के बारे में प्रोत्साहित करने के लिए गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ग्रामीण पोषण दिवस के दिन आंगनबाड़ी ही केंद्रों पर मातृ समिति की बैठक होगी, जिसमें केंद्र पर चिंहित कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए परिचर्चा की होगी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि कुपोषण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु व उसके जीवन के पहले दो वर्षों पर सबसे अधिक पड़ता है। इसके बाद प्रयास करने पर भी कुपोषण को दूर करना कठिन हो जाता है। इसके लिए आवश्यक है कि समाज और परिवार में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को संतुलित व पौष्टिक आहार देने के प्रति जागरूकता बढ़े। वहीं, भाग्यनगर ब्लॉक की प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी पुष्पा ने बताया छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार देने की शुरुआत करनी चाहिए। बच्चों को टीवी व मोबाइल देखते हुए खाना नहीं खिलाना चाहिए।