देश की महारत्न कंपनी गेल के पाता पैट्रोकेमिकल संयंत्र में द्वितीय चरण विस्तारीकरण एवं कमीशनिंग का कार्य पूरा हो गया। कमीशनिंग के बाद पाता पैट्रोकेमिकल पूरे प्रदेश में अधिक क्षमता वाला संयंत्र बन गया है।
विस्तारीकरण में छह हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद अब गेल पाता संयंत्र की क्षमता बढ़कर आठ लाख 10 हजार टन प्रतिवर्ष पालीमर उत्पादन की हो गई है। अभी तक प्लांट की क्षमता चार लाख 10 हजार टन प्रतिवर्ष थी।
‘अमर उजाला’ से वार्ता में गेल पाता के महाप्रबंधक एवं प्रभारी अधिकारी एमआर मेश्राम ने बताया कि वार्षिक शट डाउन के बाद जून के पहले सप्ताह से पुराने प्लांट के साथ विस्तारीकृत प्लांट से भी उत्पादन शुरू हो जाएगा। वित्तीय वर्ष 2014-15 में जहां गेल पाता संयंत्र ने चार लाख 50 हजार टन पालीमर उत्पादित किया।
विस्तारीकरण के उपरांत वर्तमान वित्तीय वर्ष में पालीमर उत्पादन छह लाख टन प्रतिवर्ष हो जाएगा। अगले दो वर्षों में पालीमर उत्पादन बढ़कर आठ लाख 10 हजार टन हो जाएगा।
गेल पाता के विस्तारीकरण के उपरांत क्षेत्र एवं क्षेत्रीय लोगों को लाभ के बारे में उन्होंने बताया कि वर्तमान में संविदा कर्मियों की संख्या 3500 है। वह बढ़कर पांच हजार से अधिक हो जाएगी। पिछले वित्तीय वर्ष में गेल पाता एवं गेल दिबियापुर ने सरकार को इंट्री टैक्ट से रूप में लगभग 1300 करोड़ रुपये दिए।
उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ प्रदेश सरकार को दिया जाने वाला रेवेन्यू भी बढ़ेगा। इससे क्षेत्र के विकास की गति को नया आयाम मिल सकेगा।
मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक एके श्रीवास्तव के अनुसार अगले वित्तीय वर्ष में कांट्रेक्ट वर्करों को मिनिमम वेज के साथ यूनीफार्म एवं 8.3 फीसदी बोनस पर गेल प्रबंधन द्वारा विचार कर रहा है।
कांट्रेक्ट वर्करों के हित में कई अन्य कदम उठाए जा रहे हैं। कांट्रेक्ट वर्करों की तनख्वाह सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। इस मौके पर मानव संसाधन वरिष्ठ अधिकारी प्रदोष भारद्वाज भी मौजूद रहे।