फोटो 10एयूआरपी06- मैदान में धूप सेंकते गोवंश
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औरैया। किसानों को अन्ना गोवंश से निजात दिलाने के लिए स्थायी गोशालाओं का इंतजाम शासन ने किया, लेकिन इन गोशालाओं में बंद पशुओं के लिए संसाधनों का अभाव है। सर्दी की शुरूआत हो चुकी है, लेकिन अभी तक बचाव के लिए झूल का इंतजाम नहीं हो सका है। प्रधान और सचिव ने स्वयं की धनराशि से पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए पन्नी का इंतजाम जरूर कर दिया है।
सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जैतापुर की गांव मिर्जापुर बैरमशाह में सवा करोड़ रुपये की लागत से स्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया है। इसे चालू हुए करीब चार माह बीत चुके हैं, अभी तक बजट के नाम पर मात्र 2400 रुपये प्राप्त हुए हैं। जैतापुर ग्राम पंचायत निधि से देखरेख के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये से अधिक की धनराशि खर्च हो चुकी है। पशुओं के चारा खाने के लिए बनवाई गई नाद नीची बनी है। जिसमें जानवर गंदगी फैला रहे हैं। चारा खराब हो रहा है। जानवरों को बंद करने के लिए लगाई की बाड़ एक तरफ उखड़ गई है। जिससे आए दिन गोवंश बाहर निकल जाते हैं। जिन्हें पकड़ने के लिए यहां तैनात कर्मचारियों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। गोशाला में मौजूद करीब डेढ़ सैकड़ा गोवंश को सूखा चारा दिया जा रहा है। जिससे उनकी सेहत खराब हो रही है। हफ्तेभर में एक या दो जानवर की मौत की सूचना आ ही जाती है।
दो स्थायी व 32 अस्थायी गोशालाएं हो रहीं संचालित
जिले में उमरी और मिर्जापुर बैरमशाह में स्थायी व 42 अस्थायी गोशालाओं में करीब 3500 गोवंश बंद हैं। जिनमें 40 फीसदी गोशालाओं में ही झूलें (बोरे) पहुंच सके हैं। हालांकि इस संबंध में डीएम अभिषेक सिंह ने सभी खंड विकास अधिकारियों को गोशालाओं तक झूलें (बोरे) भिजवाने के निर्देश हैं। वहीं, गोशालाओं में हरा चारा भेजने की स्कीम भी परवान नहीं चढ़ती दिख रही।
डीएसओ ने सभी गोदामों पर पर्याप्त मात्रा में झूल के लिए बोरे उपलब्ध करा दिए हैं। संबंधित ब्लॉक ग्राम प्रधान पूर्ति निरीक्षक से संपर्क कर बोरे प्राप्त कर सकते हैं। हरे चारे संबंध में भी सभी आवश्यक दिशा-निर्देश उच्चाधिकारियों द्वारा दिए जा चुके हैं।
-अनिल कुमार, जिला पशु चिकित्साधिकारी