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गौरैया तालाब संरक्षित स्मारक घोषित हो

Tue, 12 Jan 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
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शहर में कानपुर रोड स्थित ऐतिहासिक गौरैया तालाब के सुंदरीकरण के प्रयासों से जहां आम जनता में खुशी है। वहीं लोगों ने संवत 1434 में स्थापित इस मंदिर और तालाब को पुरातत्व विभाग का संरक्षण दिलाए जाने की मांग की है। साथ ही इसके ऐतिहासिक स्वरूप से छेड़छाड़ न किए जाने की भी अपील की गई है।
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सैकड़ों साल पुराने गौरैया तालाब के सुंदरीकरण को जिला प्रशासन के प्रयास अब लोगों में चर्चा का विषय बनने लगे हैं। मंदिर और तालाब के इतिहास को बताने के लिए मंदिर परिसर में लगा संवत 1434 का शिला लेख मंदिर के ऐतिहासिक होने की पुष्टि भी कर रहा है। तालाब को दूधिया रोशनी से सुसज्जित करने, पार्क का निर्माण कराए जाने आदि के लिए डीएम माला श्रीवास्तव की ओर से उठाए गए कदम को लोगों ने खुले दिल से सराहा है। लेकिन देखरेख के अभाव में दिन पर दिन जर्जर हो रहे मंदिर की दशा सुधारने को लेकर लोगों में इस ऐतिहासिक धरोहर को पुरातत्व विभाग को सौंपे जाने की मांग उठने लगी है।

यह मंदिर गुप्ता परिवार ने बनवाया था। लंबे अर्से से उनका आना-जाना नहीं है। ऐसे में उन्होंने औरैया निवासी मुन्ना लाल अग्रवाल को इसका सर्वराकार बना दिया था। मंदिर के पास कई एकड़ जमीन व दुकानें हैं। लेकिन सर्वराकार के ध्यान न दिए जाने से मंदिर जीर्णशीर्ण हालत में पहुंचता जा रहा है। वहीं तालाब में गंदगी डाले जाने के कारण इसका भी उपयोग लोगों ने बंद कर दिया था। शहर की ऐतिहासिक धरोहर को खंडहर में तब्दील होने से बचाने के लिए इसको पुरातत्व विभाग का संरक्षण दिलाया जाना चाहिए।
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 भगवान शंकर के इस ऐतिहासिक मंदिर को उसकी भव्यता और सैकड़ों साल पुराने इतिहास को देखते हुए पुरातत्व विभाग की देखरेख मिलनी चाहिए। जिससे मंदिर पर तत्कालीन समय में उकेरे गए चिंह और तालाब की ऐतिहासिक बनावट से छेड़छाड़ न हो सके। जिला प्रशासन को भी इस तालाब के सुंदरीकरण कराए जाने में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। जिससे सुंदरीकरण के चलते तालाब का इतिहास ही दबकर न रह जाए।

मंदिर का अपना कोई ट्रस्ट न होने के कारण इसकी सही तरीके से देखरेख नहीं हो सकी है। इसके कारण प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। इससे ऐतिहासिक मंदिर के अस्तित्व को भी खतरा हो रहा है। हालांकि श्रद्धालुओं से एकत्रित चंदे से मंदिर परिसर में एक बड़ा बरामदा बनवा दिया गया है। जिससे भागवत आदि पूजा अर्चना के कार्यक्रम कराए जा सकें। ऐसे में पुरातत्व विभाग की सूची में दर्ज हो जाने पर इसकी ठीक ढंग से देखरेख हो सकेगी।
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