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Auraiya News: गौहानी कलां मार्ग जलमग्न, सिकरोड़ी गांव में घुसा पानी

Sun, 07 Sep 2025 12:20 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो 06 एयूआरपी 10 सिकरोड़ी गांव के रास्ते पर बढ़ता जलस्तर। संवाद
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औरैया। कोटा बैराज से छोड़े गए पानी से आई बाढ़ के कारण यमुना नदी सीजन में तीसरी बार उफान पर है। शनिवार को गौहानी कलां मार्ग जलमग्न हो गया। यहां लोगों को आवागमन के लिए नाव चलानी पड़ी।
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कई गांवों का रास्ता भी टूट चुका है। वहीं, सिकरोड़ी में बाढ़ का पानी गांव में घुस चुका है। शनिवार को यमुना नदी का जलस्तर 112.42 मीटर रिकॉर्ड किया गया। यह खतरे के निशान से छह सेंटीमीटर कम रहा। उधर जलस्तर में बढ़ोतरी से तलहटी में बसे गांवों में खलबली मची हुई है।
हर साल मानसून के सीजन में यमुना में एक बार ही बाढ़ आती थी, लेकिन इस बार बाढ़ ने अगस्त व सितंबर माह में तीन बार दस्तक दी है। हालांकि यह बाढ़ बैराजों से छोड़े गए पानी का यह असर है। इससे औरैया व अजीतमल तहसील क्षेत्र के करीब 22 गांव बाढ़ की चपेट में आते दिख रहे हैं। शनिवार को भी जलस्तर में उछाल दिखा।
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जलस्तर में बढ़ोतरी से सिकरोड़ी, गौहानी कलां गांव, जुहीखा, बड़ेरा, तातरपुर कलां आदि गांवों तक पानी जा पहुंचा। वहीं अयाना में गूंज, असेवा, असेवटा, मई, फरिहा, बीझलपुर, मिश्रपुर, नौरी, जगतपुर आदि गांवों के किनारे पानी पहुंच गया है। इससे गांव के लोग दहशत में है।
सिकरोड़ी गांव में तो पानी घुस गया है। वहीं गौहानी कलां संपर्क मार्ग पानी से डूब जाने से यहां के लोग नाव से आवागमन करते नजर आए। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार के मुताबिक बुधवार शाम से यमुना नदी में जलस्तर बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ था। यह क्रम दो दिनों से जारी था।
शनिवार को भी यमुना के जलस्तर में हर घंटे एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दोपहर दो बजे तक यमुना का जलस्तर 112.42 मीटर तक पहुंच गया। हालांकि विभाग का दावा है कि शनिवार शाम से जलस्तर स्थिर हो जाने की संभावना जताई गई है।
एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में जरूरत के लिहाज से लोगों को ऊंचाई पर पहुंचाने का कदम उठाया जाएगा। यमुना का जलस्तर स्थिर हो जाने की संभावना है।

अफसरों ने गांवों में जाकर ग्रामीणों को किया जागरूक
एसडीएम निखिल राजपूत, तहसीलदार अविनाश कुमार व नायब तहसीलदार प्रतिभा पाल लगातार बाढ क्षेत्र पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने यमुना किनारे बसे गौहानी कलां, सिकरोड़ी, बड़ेरा, गूंज, ततारपुर आदि गांवों के लोगों से मुलाकात कर उनसे हाल चाल जाना। उन्होंने गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को बाढ़ के खतरे से जागरूक किया।

बाढ़ आने से परेशानी
सिकरोड़ी निवासी गंगाराम ने बताया कि हर वर्ष बाढ़ का दंश पड़ता है। इस साल तीन- तीन बार बाढ़ आने से परेशानी हो रही है। इससे न ठीक से परिवार पाल पा रहे हैं और न ही खेती में कुछ हो पा रहा है।
तीसरी बार आफत आई
रानी देवी ने बताया कि सबसे ज्यादा समस्या पशुओं के चारे की होती है। आस पास पानी भर जाने से हरा चारा नहीं मिल पाता है। बाढ़ आते ही गांव से पलायन की तैयारी में जुट जाते हैं। इस बार तो तीसरी बार आफत आई है।
फसल के लिए 707 को मुआवजा व घर गिरने में 21 पीड़ितों की मदद
हाल ही में आई बाढ़ की चपेट में औरैया व अजीतमल तहसील क्षेत्र के 22 गांव आए थे। यहां पर शासन से लेकर जिला प्रशासन की मदद लगातार पहुंची थी। अजीतमल क्षेत्र में फौरी तौर पर मदद के लिए 1098 राशन किटें बांटी गई थीं। वहीं 27265 भोजन के पैकेट बांटे गए थे।
बाढ़ कम होने के बाद हुए सर्वे में प्रशासन की ओर से 707 किसानों को फसलों का मुआवजा दिया गया था। जबकि 21 लोगों को मकान ढह जाने व क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में आर्थिक मदद दी गई थी। अब एक बार फिर से यहां के लोग त्रासदी की चपेट में आते नजर आ रहे हैं।
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