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Auraiya News: कच्चे माल के दाम और मजदूरी बढ़ने से महंगा हुआ फर्नीचर

Wed, 19 Aug 2026 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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रोडवेज स्टैंड के सामने लकड़ी का काम करते कारीगर। संवाद
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औरैया। लकड़ी के फर्नीचर बनवाना अब आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहा है। पिछले कुछ समय में लकड़ी के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कारीगरों की दिहाड़ी भी बढ़ गई है, जिससे फर्नीचर महंगा हो गया है।
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व्यापारियों के अनुसार, बाजार में साखू की लकड़ी की मांग सबसे अधिक है। हालांकि, आम आदमी ज्यादातर आम और नीम की लकड़ी के फर्नीचर बनवाता है। लकड़ी की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक का उछाल आया है। इससे कच्चे माल की लागत काफी बढ़ गई है। लकड़ी की कीमतें बढ़ने के साथ ही कारीगरों की दिहाड़ी भी महंगी हो गई है। पहले जो कारीगर 800 रुपये प्रतिदिन की दिहाड़ी पर काम करते थे, वे अब 1000 रुपये या उससे अधिक मांग रहे हैं। लोग अब प्रतिदिन दिहाड़ी पर काम कराने के बजाय ठेके पर काम देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।


परिवहन और मंडी शुल्क के कारण बढ़ गए दाम
पीछे से ही लकड़ी के दामों में तेजी आई है। परिवहन और मंडी शुल्क के कारण आम और नीम जैसी लकड़ियों के दाम भी 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, इससे ग्राहक बजट देखकर खरीदारी कर रहे हैं।
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-मोतीलाल शर्मा, लकड़ी व्यवसायी
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लागत बढ़ने से व्यापार में है सुस्ती
बाजार में साखू की लकड़ी की मांग सबसे ज्यादा है, लेकिन इसकी आवक कम और कीमतें अधिक होने से व्यापार पर असर पड़ा है। फर्नीचर की कुल लागत बढ़ने से बिक्री में सुस्ती है।
-शारिक खान, लकड़ी व्यवसायी


कम मिल रहा काम
बढ़ती महंगाई में 800 रुपये की दिहाड़ी पर गुजारा मुश्किल हो गया था, इसलिए अब 1000 रुपये रोज मांग रहे हैं। हालांकि काम कम मिलने की वजह से मजदूरी बढ़ाने का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा।
-इकबाल, फर्नीचर कारीगर
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ठेके पर काम देना ज्यादा पसंद आ रहा
अब लोग दिहाड़ी पर काम कराने के बजाय ठेके पर काम देना ज्यादा पसंद करते हैं। ठेके में समय और लागत सीमित हो जाती है, इससे हमारी कुल आमदनी में गिरावट आई है।
- चांदबाबू, फर्नीचर कारीगर

रोडवेज स्टैंड के सामने लकड़ी का काम करते कारीगर। संवाद

रोडवेज स्टैंड के सामने लकड़ी का काम करते कारीगर। संवाद

रोडवेज स्टैंड के सामने लकड़ी का काम करते कारीगर। संवाद

रोडवेज स्टैंड के सामने लकड़ी का काम करते कारीगर। संवाद

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