पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को औरैया में दर्ज रंगदारी वसूली के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने अगली सुनवाई तक केस की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए विपक्षी पक्षों से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
जेल से रंगदारी वसूली का रैकेट संचालित करने के मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने औरैया में दर्ज मुकदमे की आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की पीठ ने की।
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अधिवक्ताओं ने दलील दी कि कमलेश वर्ष 2020 से एक अन्य मामले में जेल में बंद है। बावजूद इसके वर्तमान मामले में उनके ऊपर जेल से सह अभियुक्त अब्दुल सत्तार के माध्यम से रंगदारी वसूलने का बेबुनियाद आरोप लगाया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य और प्रथम सूचनाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि विवेचना के दौरान ऐसा कौन-सा ठोस साक्ष्य मिला, जिससे यह साबित हो सके कि कमलेश पाठक ने जेल से सह अभियुक्त से संपर्क किया था।
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अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि सूचनाकर्ता ने वर्ष 2021 में एक मुकदमा दर्ज कराया था जिसमें अब्दुल सत्तार आरोपी था, लेकिन उस समय कमलेश पाठक का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था। इसके करीब पांच साल बाद वर्ष 2026 में यह नया मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जब आरोपी पहले से ही जेल में बंद है, तो जेल से रैकेट चलाने के समर्थन में कोई पुख्ता सामग्री पेश नहीं की गई। चार्जशीट में न तो जेलर और न ही किसी अन्य जेल अधिकारी का बयान शामिल है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे विचारणीय माना है और विपक्षी पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होगी। तब तक औरैया कोतवाली से संबंधित केस कार्यवाही पूरी तरह स्थगित रहेगी।