श्रीमद भागवत एवं श्रीराम कथा की दिव्य अमृत वर्षा में पं. संतोष शुक्ला ने भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए गोपी उद्वव प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि गोपियां कृष्ण के विरह में उतनी व्यथित हो गईं कि उद्वव का ज्ञान भक्ति स्वरूप गोपियों के आगे शून्य पड़ गया।
जय श्रीराम सेवा समिति द्वारा नृसिंह वाटिका गेस्ट हाउस में आयोजित 11 दिवसीय श्रीमद भागवत कथा एवं श्रीराम कथा की दिव्य वर्षा में पं. संतोष शुक्ला ने कहा कि सुदामा जीव का मिलन सच्ची मित्रता को प्रमाणित करता है।
कहा कि जीव जब संसार से निवृत हो जाता है तो ब्रह्म से साक्षात हो जाता है, उसे ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है। भगवान ने ब्राह्ममणों को अपना आराध्य माना है।
उन्होंने कहा कि भगवान पहले कुछ लेते हैं, फिर कुछ देते है। धर्म के मार्ग पर चलने, माता-पिता गुरू असहाय की सेवा के फल से भी मानव का कल्याण होता है। इसलिए मानव को हमेशा अपने माता-पिता का कभी भी दिल नहीं दुखाना चाहिए और बड़ों का आदर सम्मान करना चाहिए। कथा समापन अवसर पर आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।