विद्युत संतृप्तिकरण का कार्य अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ता जा रहा है। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने को किया गया काम पूरी तरह से विफल साबित रहा है। कानपुर रोड में बर्फ फैक्ट्री के पास रविवार को धूं-धूं कर जले दो ओवरलोड ट्रांसफार्मर इसके जीते जागते उदाहरण हैं।
रविवार को विभागीय अनदेखी के चलते बर्फ फैक्ट्री के पास रखे 400 व 250 केवीए के ट्रांसफार्मर ओवरलोड के चलते एक साथ धड़ाम हो गए। ट्रांसफार्मरों में जबरदस्त आग लग गई। आननफानन में बिजली आपूर्ति बंद करवाई। आग की ऊंची-ऊंची उठती लपटों ने बाजू की बर्फ फैक्ट्री को भी आगोश में ले लिया।
इस आग से बर्फ फैक्ट्री की छत पर लगा छप्पर जल गया। वहीं अंदर रखे अमोनिया के सिलेंडरों तक आग नहीं पहुंच पाई। इससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अग्निशमन कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया।
विद्युत विभाग से एक वर्ष पूर्व तक शहर को विद्युतीकरण से संतृप्त करने को आरएपीडीआरपी योजना के तहत सभी विद्युत संबंधी समस्याओं को करोड़ों रुपये खर्च कर दूर करने का दावा किया था। गर्मी का दौर शुरू होते ही विभागीय दावे हवाई साबित होते दिख रहे हैं।
योजना के तहत ओवरलोड ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाए जाने थे, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने मनमानी दिखाते हुए ऐसे ट्रांसफार्मरों के पास अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगवा दिए, जहां ओवरलोड का कोई मतलब ही नहीं, जबकि ऐसे मोहल्लों पर अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगवाने पर ध्यान नहीं दिया।