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Auraiya News: खराब एक्सरे मशीनें दिखा रहीं स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत

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फोटो-21- टीबी यूनिट में एक्सरे के लिए बिना मास्क के मौजूद मरीज। संवाद - फोटो : थाना फरिहा क्षेत्र के नगला फतेह- कौरारी मार्ग पर हादसे के बाद खड़ा क्षतिग्रस्त ऑटो। संवाद
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औरैया। यूं तो स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी को लेकर तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर असल तस्वीर अव्यवस्थाओं के चलते कुछ और ही हाल बयां कर रही है। बानगी के तौर पर जिले के मेडिकल कॉलेज का हाल बेहाल है। यहां पिछले एक सप्ताह से सामान्य मरीजों की एक्सरे की जांच टीबी यूनिट में रिसते संक्रमण के बीच की जा रही है। मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी में रखी चार एक्सरे मशीनें खराब हो गई हैं। हैरत की बात तो यह है कि जिम्मेदारों ने इन्हें दुरुस्त कराना भी मुनासिब नहीं समझा है।
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इन दिनों मेडिकल कॉलेज की ओपीडी 800 मरीजों के पार जा रही है। इनमें से रोजाना 150 मरीजों के एक्सरे को लेकर डॉक्टर परामर्श दे रहे हैं। डॉक्टरी परामर्श पर मरीज पर्चा लेकर पुरानी बिल्डिंग में मौजूद एक्सरे कक्ष में पहुंच रहे हैं। यहां पर घंटों इंतजार के बाद मरीजों को टीबी यूनिट की कर्मचारी राह दिखा रहे हैं। इसके बाद मरीज टीबी यूनिट पहुंचते हैं। वहां पर एक्सरे की जांच के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
शनिवार को टीबी यूनिट में बहुतायत में सामान्य मरीज एक्सरे की जांच कराने पहुंचे। किसी का पैर टूटा हुआ था तो किसी का हाथ। कोई स्ट्रेचर पर तो कोई व्हीलचेयर पर पहुंचा। यहां बिना मास्क के उनके सिर पर टीबी के संक्रमण का खतरा भी मंडराता रहता है। टीबी यूनिट में एक्सरे टेक्नीशियन के देरी के आने के चलते चुनिंदा लोगों के ही शनिवार को एक्सरे हो सके। ऐसे में कई मरीज निराश होकर लौट गए।
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मेडिकल कॉलेज की हाईटेक व्यवस्थाओं के दावे की एक्सरे की खराब मशीनें पोल खोल रही हैं। जानकार बताते हैं कि ये मशीनें एक साथ तो खराब हुईं नहीं होगी। एक सप्ताह से जब यह समस्या चली आ रही थी तो इसे दूर कराने की जहमत तक नहीं उठाई गई। ऊपर से सामान्य मरीजों को टीबी यूनिट में एक्सरे के लिए क्षय रोगियों के बीच भेज दिया जा रहा है।

चार में दो मशीनें तो एक साल के अंदर ही हो गईं खराब
मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में एक्सरे की चार मशीनें उपलब्ध हैं। इनमें से दो मशीनें तो एक साल के अंदर ही आईं हैं। इन मशीनों में तीन डिजिटल तो एक सादा एक्सरे मशीन है। लाखों की कीमत वाली इन मशीनों का खराब होना गुणवत्ता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

शरीर के कई हिस्सों के एक्सरे तो पूरी तरह हो गए बंद
टीबी यूनिट की एक्सरे मशीन से टीबी रोगियों के चेस्ट का एक्सरे होता है। मगर मेडिकल कॉलेज में दुर्घटनाओं में घायल होने वाले मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। अस्पताल में एक्सरे मशीनें खराब होने के कारण बड़े पार्ट जैसे कमर, रीढ़, हाथ-पैर की हड्डियों और अन्य जटिल जांचों का कार्य टीबी यूनिट में संभव ही नहीं है। मरीजों को वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। कई मरीज निजी जांच केंद्रों पर महंगे दामों में एक्सरे कराने को मजबूर हैं।

टीबी यूनिट की एक्सरे मशीन महज 25-30 रोजाना कर सकती जांच
टीबी यूनिट में केवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की तरह एक सीमित क्षमता वाली मशीन है। जो अधिकतम 25-30 एक्सरे प्रतिदिन करने में सक्षम है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज में आने वाले अधिकांश मरीजों की जांच टीबी यूनिट के जरिए संभव ही नहीं है।

वर्जन-

पैथोलॉजी की एक्सरे मशीनें खराब हो गई हैं। इसकी सूचना मिली है। मशीनों को दुरुस्त कराने के लिए इंतजाम किया गया है। टीबी यूनिट में वैकल्पिक व्यवस्था कराई गई है। किसी तरह काम चलाया जा रहा है।-डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस मेडिकल कॉलेज

फोटो-21- टीबी यूनिट में एक्सरे के लिए बिना मास्क के मौजूद मरीज। संवाद- फोटो : थाना फरिहा क्षेत्र के नगला फतेह- कौरारी मार्ग पर हादसे के बाद खड़ा क्षतिग्रस्त ऑटो। संवाद

फोटो-21- टीबी यूनिट में एक्सरे के लिए बिना मास्क के मौजूद मरीज। संवाद- फोटो : थाना फरिहा क्षेत्र के नगला फतेह- कौरारी मार्ग पर हादसे के बाद खड़ा क्षतिग्रस्त ऑटो। संवाद

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