फोटो-7-मेडिकल कॉलेज में मरीज देखतीं जनरल फिजीशियन। संवाद
औरैया। फास्ट फूड और जंक फूड की बढ़ती लत लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। जिले में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (पेट रोग विशेषज्ञ) की तैनाती नहीं है।
ऐसे में शुरूआत में बीमारी का पता नहीं चल पाता। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए कानपुर रेफर किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार तला-भुना, पैकेट बंद भोजन, कोल्ड ड्रिंक और अनियमित दिनचर्या फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण बन रहे हैं।
पहले यह बीमारी सिर्फ मोटे लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब सामान्य वजन वाले युवा और किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच और खानपान में सुधार न किया जाए तो फैटी लिवर आगे चलकर लिवर सिरोसिस और लिवर फेलियर जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकता है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 20 मरीज लिवर की परेशानी से संबंधित आ रहे हैं। अल्ट्रासाउंड जांच में कई मरीजों में फैटी लिवर की पुष्टि हो रही है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण उन्हें बाहर रेफर करना मजबूरी बन गई है। मरीज जनरल फिजीशियन से ही दवा लेकर खाने लगते हैं, बाद में बंद कर देते हैं। इससे बीमारी बढ़ती जाती है। गंभीर स्थिति होने पर बाहर जाकर इलाज कराना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज की जनरल फिजीशियन अपर्णा शंखवार ने कहा कि लोग ताजे फल-सब्जियां, फाइबर युक्त भोजन अपनाएं और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। साथ ही शराब सेवन से बचना और समय-समय पर लिवर की जांच कराना बेहद जरूरी है।