बिधूना(औरैया)। रामगंगा नहर की खांदी कटने से 165 किसानों की 90 बीघा मूंगफली और 100 बीघा धान की नर्सरी खराब हो गई। उनकी गुजर-बसर इसी के भरोसे थी। समय से जिम्मेदारों के न पहुंचने से गृहस्थी को भी नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि उनकी पाई-पाई डूब गई। दोबारा खेत तैयार करने में समय लगेगा। ऐसे में प्रशासन को मुआवजा देना चाहिए। वहीं अफसर इसे आपदा न बताकर मुआवजे का प्रावधान न होने की बात कह रहे हैं। नहर विभाग के अधिकारियों ने अज्ञात किसानों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
बिधूना तहसील के गपचरियापुर के पास सोमवार को रामगंगा नहर की खांदी कटने से सबहद कटरा, बटटा, मुग्गपुर, कुआ पुर्वा के किसानों की हजारों बीघा फसल डूब गई थी। गांव भी जलमग्न हो गए थे। लोगों की गृहस्थी, चारा व अन्य सामान बर्बाद हो गया। गपचरियापुर के किसान वीरेंद्र, सरवनल सिंह, रामकिशोर, ओमकार, राघवेंद्र, रामगोपाल, रमेश चंद, सतेंद्र कुमार लालसिंह, राजेश कुमार ने बताया कि करीब 120 किसानों की मेहनत डूब गई है।
कुछ किसानों की मक्का की फसल भी बर्बाद हुई है। सबहद में छोटेलाल, बदले शाक्य, दीपू चौहान समेत 20 किसानों की मूंगफली और धान की नर्सरी बर्बाद हो गई। बटटा गांव में लगभग 25 किसानों को नुकसान हुआ है। यहीं हाल मुग्गापुर और कुआपुरवा का भी है। इन गांवों में किसानों की सैकड़ों बीघा फसल अभी भी जलमग्न है।
खेत दोबारा तैयार करने में लगेगा समय
सबहद निवासी प्रभाकर सिंह ने बताया कि खेतों में पानी भरने से मूंगफली और धान की नर्सरी खराब हो गई है। अब खेत दोबारा तैयार करने में समय लगेगा। पूरे साल की मेहनत बर्बाद हो गई। परिवार के गुजर बसर में दिक्कत होगी। साथ ही फसल बोने के लिए जो कर्ज लिया था, उसकी भी भरपाई करना मुश्किल होगा।
एक झटके में सब तबाह
किसान महेश ने बताया कि कई महीनों की तैयारी के बाद मूंगफली और धान की नर्सरी तैयार की थी। बारिश न होने से फसल बर्बाद होने की चिंता पहले से थी। नहर से आए पानी ने एक झटके में सब कुछ तबाह कर दिया। बच्चों की पढ़ाई लिखाई के साथ घर का खर्च इन्हीं फसलों के भरोसे था। प्रशासन को मुआयना करा कर मुआवजा देना चाहिए।
बलकट पर खेती लेेने वाले मुसीबत में
प्रदीप कुमार ने बताया कि किसान समय-समय पर कई परेशानियां उठाता है। रामगंगा नहर से पानी आने के बाद कई किसान पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। जिन किसानों ने बलकट पर दूसरे की खेती ले रखी थी, उनके सामने बड़ी मुसीबत है। इसके बाद भी प्रशासन किसानों की समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा
गांवों में जलभराव होने से अब किसानों को गंदगी और कीचड़ के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा सताने लगा है। किसानों ने प्रशासन से गांव की सफाई और जल निकासी कराने की मांग की है।
यह समस्या आपदा में नहीं आती है। इसलिए किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा। नहर की खांदी कटने से काफी जल बर्बाद हुआ है। नहर विभाग ने तहरीर दी है। खांदी काटने वाले किसानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। - राशिद अली खान, एसडीएम बिधूना