औरैया। इन दिनों रबी की बुआई शुरू हो चुकी है लेकिन किसानों को खाद (डीएपी) नहीं मिल पा रही है। खासकर सीमावर्ती इलाकों में न तो सहकारी समितियों पर डीएपी नहीं मिल रही है। कंचौसी प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक भाग्यनगर के गांव कंचौसी साधन सहकारी समिति पर शुक्रवार को खाद वितरण के दौरान किसानों ने जमकर हंगामा काटा।
किसान सुनील शुक्ला, रामसेवक, सियाराम, महेश तिवारी, संजय यादव ने आरोप लगाया कि सुबह से ही वह लोग लाइन में लग गए। सचिव ने आधार कार्ड जमा करा लिए। नंबर से खाद न देकर चहेते किसानों को खाद वितरण शुरू कर दी। इससे नाराज किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। खाद लेने के लिए हीरानगर, रोशनपुर, विनपुरापुर, जामौली, बिहारीपुर, कंचौसी गांव आदि से बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के लिए के एकत्रित हुए थे।
इस संबंध में सचिव अनोज कुमार का कहना है कि किसान जरूरत से अधिक खाद मांग रहे हैं, लेकिन स्टाॅक कम होने के कारण दे पाना संभव नहीं है। इससे किसान झूठे आरोप लगा रहे हैं। सभी किसानों को खाद देने का प्रयास किया जा रहा है।
अछल्दा प्रतिनिधि के मुताबिक बैसोली व अछल्दा सहकारी संघ पर खाद नहीं है। किसान कई दिनों से खाद के लिए चक्कर लगा रहे हैं। जिससे बुआई और खेतों में खड़ी फसल प्रभावित हो रही है। किसान जल्द खाद मुहैया कराए जाने की मांग कर रहे हैं। कुछ सहकारी समितियों में बकायेदारी के कारण उन्हें खाद नहीं मिल सकी है। जिसके चलते किसानों को परेशानियां हो रही हैं। जिले की कई समितियों पर पुराना बकाया है। समिति के जिम्मेदार अभी तक बकाया नहीं चुका सके हैं।
अछल्दा संघ के प्रभारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि 24 अक्तूबर से खाद जिले को नहीं मिल रही है जबकि डिमांड बराबर लगाई जा रही है। एक-दो दिन में डीएपी खाद आने की संभावना है। बैसोली संघ के प्रभारी संतोष कुमार ने बताया कि 14 नवंबर से खाद नहीं है, डिमांड लगाई है। सोमवार या मंगलवार तक खाद आने की उम्मीद है।
हमारे स्टाक मे अभी 669 मिट्रिक टन खाद उपलब्ध है। जहां-जहां से डिमांड की जा रही है वहां से पहुंचाई जा रही है। अगर किसी जगह नहीं है तो एक-दो दिन में पहुंच जाएगी।
- विजय प्रकाश वर्मा, एआर कॉपरेटिव
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रबी को लेकर उर्वरक की कोई कमी नहीं है। प्राइवेट सेक्टर में भी पर्याप्त खाद है। वितरण में कोताही करने की जानकारी होने पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सहकारी समितियों की मांग के अनुसार डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी।
- शैलेंद्र कुमार वर्मा, जिला कृषि अधिकारी