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मानसून में देरी, अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा रही गर्मी

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औरैया। खरीफ की फसल की बुवाई में एक सप्ताह बचा है। बारिश न होने से किसानों को चिंता सता रही है। बारिश न होने से धान की पौध रोपाई का प्रभावित हो रही है। वहीं मक्का और सब्जी की फसलों की प्राइवेट नलकूपों से सिंचाई करने पर किसान मजबूर हैं।
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जिले में करीब 86 हजार हेक्टेयर में खरीफ की फसल की बुवाई की जाएगी। कृषि विभाग द्वारा इसकी पूरी तैयारी की जा चुकी है। किसानों को अनुदान पर मिलने वाले बीज का वितरण शुरू हो गया है। बीजों का शोधन व खेतों की जुताई भी हो गई है। 15 जुलाई तक बुवाई हो जानी चाहिए। लेकिन मानसून में देरी इसमें बाधा बन रही है। सबसे ज्यादा परेशानी बीहड़ी क्षेत्र के किसानों को है। इन किसानों की मक्का, अरहर की फसलें सूखने की कगार पर हैं।
किसानों ने बताई पीड़ा
- शहर के समीपवर्ती ग्राम सुरान में अधिकांश किसान सब्जी की खेती कर रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में तोरई, लौकी, खीरा, फूट आदि की बुवाई की है। किसान राम सिंह दोहरे ने बताया कि 20 दिन से बारिश नहीं हुई है। सब्जी की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गईं हैं।
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- सदर ब्लॉक के गांव चिरुहूली के किसान अहसान खां ने बताया कि मक्का बुवाई किए 15 दिन से अधिक बीत चुके हैं। बारिश न होने से प्राइवेट नलकूप से 200 रुपये प्रति घंटे की दर से सिंचाई करने पर विवश हैं।
धान की बुवाई पिछड़ जाएगी
बेला में तिरको के किसान रामकुमार ने बताया कि मौसम सूखा रहने से जुताई व बुवाई पर असर पड़ा। किसान रामदास ने बताया कि मानसून में देरी रही तो धान की बुवाई पिछड़ जाएगी। इस समय बारिश होने से यदि खेतों में नमी पर्याप्त रहेगी तो धान की नर्सरी और बुवाई आसानी से होगी। इससे किसानों को काफी फायदा पहुंचेगा। नहरों और रजबहों में पानी न होने से समस्या विकराल हो गई है।
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