बिछड़े जोड़ों को लोक अदालत के माध्यम से एक किया गया
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औरैया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से न्यायाधीश राजीव गोयल की अध्यक्षता में रविवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिसमें 1092 मुकदमों निस्तारण हुआ। वहीं परिवार न्यायालय ने 17 जोड़ों के बीच मनमुटाव को सुलह-समझौते से दूर कराकर साथ-साथ रहने के लिए तैयार कर विदा किया।
नोडल अधिकारी अंगद प्रसाद प्रसाद व सचिव शैलेेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 771 वाद सुलह-समझौतों से तय किए गए। स्वयं जिला जज राजीव गोयल ने एमएमसी सहित छह वाद तय कर 90 हजार रुपये प्रतिकर एवार्ड किया। एडीजे लल्लू सिंह ने आठ एमएसी सहित कुुल 27 वाद तय किए।
एडीजे राज बहादुुर मौर्य ने पांच एमएससी सहित दस मामले तय कर 12 लाख 17 हजार प्रतिकर एवार्ड किया। एडीजे राम औतार यादव ने चार एमएससी तय कर सात लाख 70 हजार रुपये प्रतिकर एवार्ड किया। वहीं हरवंश नारायण त्रिपाठी ने तीन एमएससी तय कर 19 लाख 60 हजार रुपये प्रतिकर एवार्ड किया।
सीजेएम रामनेत ने कुल 602 मामले तय कर एक लाख 34 हजार 560 रुपये अर्थदंड वसूला। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अंगद प्रसाद ने 49 वाद तय कर जिला जज सभी न्यायिक अधिकारियों में 17 जोड़ों में सुलह करके उन्हें विदा किया। सिविल जज विनय कुमार विश्वकर्मा ने एक, न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप सिंह ने 26, सिविल जज शैलेंद्र सिंह ने 12, सिविल जज जूनियर डिवीजन बिधूना ने 37 मामले निस्तारित किए।