अजीतमल। कस्बे में चारों ओर बजबजाते नालों का गंदा पानी, अधूरा पड़े नाले से हालात खराब हैं। इनके किनारे खुले आसमान के नीचे जीवन काटने को मजबूर लोहापीटा समाज के दो परिवार बदहाली में दिन गुजार रहे हैं।
सरकारी अभिलेखों में दर्ज यह परिवार आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। सरकार के स्कूल चलो अभियान की पहुंच इनके बच्चों तक नहीं है। पांच छोटे-छोटे बच्चे क-ख-ग तो सीख गए लेकिन स्कूल की चौखट से दूर हैं। गंदगी और अभाव के बीच पल रहे इन मासूमों का भविष्य भी हालात की भेंट चढ़ रहा है। इस परिवार की 75 वर्षीय कमला देवी की आंखों में अब उम्मीद से ज्यादा निराशा है। वह कहती हैं कि जीवन के 50 बरस ठिठुरन भरी सर्दी, नाले के किनारे खुले आसमान में इसी बरगद के नीचे काट दिए। सिर ढकने को एक पक्का मकान मिल जाए यही सपना था।
अधूरे बने नाले के कारण हमेशा गंदा पानी जमा रहता है। उसी बदबूदार माहौल में खाना बनता है, बच्चे पलते हैं और बीमारियों का खतरा हर वक्त मंडराता रहता है। कमला देवी और उनके परिवार ने प्रशासन से अधूरे नाले का निर्माण पूरा कराने व नाले के लिए खोदे गए गड्ढे को पटिया रखकर ढकने की मांग की है।(संवाद)