शीतला माता मंदिर में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम में कथावाचक पंडित सलिल त्रिवेदी ने बताया कि बुराई का अंत निश्चित है। भगवान बुराई के नाश के लिए अच्छाई को अवश्य धरती पर भेजते हैं।
नवरात्र पर कस्बे के शीतला माता मंदिर पर भागवत महापुराण के पांचवें दिन कथा में पंडित सलिल त्रिवेदी ने माता रानी के पांचवे रूप स्कंद माता के स्वरूप का वर्णन किया ।
बताया कि माता भगवती का नाम ही स्कंद माता है । वह कार्तिकेय और गणेश जी की माता है। गणेश जी मानस पुत्र है और कार्तिकेय जी के गर्भ से उत्पन्न है ।
बताया कि तारका सुर को वरदान था कि वह शंकर जी के शुक्र से उत्पन्न पुत्र से मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। इसी कारण देवी पार्वती का शंकर जी से मंगल परिणय हुआ।
इससे कार्तिकेय पैदा हुए थे और तारका सुर का वध हुआ। शंकर- पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन संस्कृति में विवाह परंपरा का प्रारंभ माना गया । कथा पंडाल में सैकड़ों भक्तगण मौजूद रहे ।