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बिजली बिल घोटाला

Tue, 03 May 2016 11:07 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
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बिजली परियोजना - फोटो : अमर उजाला
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घरेलू बिलों में करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में मीटर रीडरों पर की गई एक तरफा कार्रवाई लोगों के गले नहीं उतर रही है। पूरे घोटाले का ठीकरा मीटर रीडरों के माथे पर फोड़कर निष्कासन की कार्रवाई अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से निष्कासित मीटर रीडरों में आक्रोश के स्वर फूटते सुनाई देने लगे हैं।
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शहर में घरेलू बिजली मीटरों में कंप्यूटर से हेराफेरी कर किए गए करोड़ों रुपये के घोटाले में टेरा कंपनी के दस प्राइवेट मीटर रीडरों को बलि का बकरा बनाया गया है। विभागीय अधिकारियों की ओर से घोटाले में लिप्त अफसरों को दर किनार कर मीटर रीडरों के ऊपर की गई निष्कासन की कार्रवाई पूरी तरह से नियोजित दिखाई दे रही है। लोगों का अनुमान है कि विभागीय अधिकारी प्राइवेट मीटर रीडरों पर कार्रवाई करवाकर अधिकारियों को बचाने में तो नहीं जुटे हैं। मामले की तह में जाएं तो पूरा घोटाला आरएपीडीआरपी कार्यालय स्थित एसडीओ कार्यालय पर लगे कंप्यूटर पर एक्सईएन के पासवर्ड से घरेलू बिजली बिलों से संबंधित है। इस घोटाले में कंप्यूटर पर चोरी छिपे एक्सईएन का पासवर्ड उपयोग कर पूरा हेरफेर किया गया।

लेकिन कार्रवाई की जद में ऐसे लोग लाए गए जो पूरे दिन फील्ड में मीटर रीडिंग का काम करते हैं। उनका कार्यालय के कंप्यूटरों से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी हालत में प्राइवेट मीटर रीडरों का निष्कासन आम लोगों के गले नहीं उतर रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंडलीय टीम के जांच अधिकारी की ओर से घोटाले में बिजली अधिकारियों की भी लापरवाही का जिक्र किए जाने की चर्चा है। इसके बावजूद उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में मीटर रीडरों का कहना है कि उनके स्तर से न तो कंप्यूटर संचालित किया गया और न ही उनके पास पासवर्ड था। इसके बावजूद टेरा साफ्टवेयर कंपनी को पत्र लिखकर उनके ऊपर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने का दबाव बनाकर निष्कासन की कार्रवाई कराया जाना अधिकारियों की मनमानी साबित कर रहा है। इस पूरे प्रकरण में मीटर रीडरों की कोई गलती नहीं है।
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मंडलीय टीम की ओर से दी गई जांच रिपोर्ट के बाद दोबारा जांच की गई। इसमें मंडलीय रिपोर्ट में बताई गई बात की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट में अधिकारियों और कर्मचारियों का सहयोग न दिया जाना पाया गया। ऐसे में कर्मचारियों के साथ-साथ अधिकारियों को भी बराबर का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट एमडी कार्यालय को प्रेषित कर दी गई है। अब उन्हीं के स्तर से कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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हरि प्रसाद गुप्ता, चीफ इंजीनियर, कानपुर मंडल
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