औरैया। कोरोना संक्रमण को लेकर लॉकडाउन का असर कोचिंग सेंटरों पर भी पड़ा है। कोचिंग सेंटर बंद होने से कोचिंग संचालक व इनसे जुड़े शिक्षकों के सामने आर्थिक दिक्कत खड़ी हो गई है। मार्च के आखिरी सप्ताह से कोचिंग बंद रहने से आमदनी का जरिया खत्म होने से जमा पूंजी भी खर्च हो चुकी है। कोचिंग संचालक व शिक्षक अब कर्ज लेकर अपना व परिवार का पेट पाल रहे हैं। ऐसे में दिन-ब-दिन कर्ज में डूबते जा रहे हैं।
शहर के मोहल्ला तिलक नगर की स्टेडियम वाली सड़क कोचिंग मंडी के नाम से पहचानी जाने लगी थी। कोरोना संक्रमण के चलते कोचिंग सेंटरों में ताले पड़ गए। पांच महीने बीतने के बाद भी ताले नहीं खुल सके हैं। आमदनी बंद होने से कोचिंग संचालकों के साथ शिक्षकों की भी जेब खाली हो चुकी है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति यहां पर पढ़ाने वाले शिक्षकों की है। उनके सामने घर चलाना मुश्किल पड़ रहा है। कोचिंग संचालकों का कहना है कि वह कर्जा लेकर किसी तरह गुजरा कर रहे हैं। कोचिंग संचालकों और शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें कुछ सहूलियतें दी जाए। इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार ने यूनिवर्सिटी और कालेजों को छूट दे रखी है, लेकिन उन्हें कोई नहीं पूछ रहा है। अधिकांश कोचिंग सेंटर किराये के मकानों में चलते हैं, जिनका किराया देने में वह अब असमर्थता महसूस कर रहे हैं।
स्टेडियम रोड पर डीप स्टडी सेंटर पर एसएससी, बैंक, पुलिस, एयरफोर्स आदि की ट्रेनिंग कराई जाती थी। इस समय बंद है। इस केंद्र के संचालक व एक शिक्षक ने बताया कि लॉकडाउन लगते है कोचिंग सेंटर बंद हो गया था। वह कर्जा लेकर अपना गुजर बसर कर रहे हैं। जबकि सेंटर के शिक्षक काम की तलाश में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। शिक्षक सचिन ने बताया कि कोरोना काल में न तो कहीं काम मिला है और न ही इस समय काम की आस दिख रही है।
शहर के मोहल्ला सत्तेश्वर निवासी दीपक अवस्थी का कहना है कि स्कूल व कोचिंग से खर्च चलता था। कोरोना संक्रमण के कारण खर्च चलाने के लिए पूरी तरह पिता और अन्य परिजनों पर निर्भर रहने को मजबूर होना पड़ा है। काफी आर्थिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
शहर के मोहल्ला विधिचंद्र निवासी प्रवीण पांडेय ने बताया कि उनके जैसे कई लोग कोचिंग सेंटरों में पढ़ाकर व अपनी कोचिंग चलाकर गुजर बसर करते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन घोषित होने के बाद से कोचिंग बंद है। यही स्थिति कुछ महीने रही तो गुजारा मुश्किल हो जाएगा।
मूल रूप से कसोलर निवासी ब्रजेश अवस्थी ने बताया कि वह कोचिंग चलाकर घर का खर्च चलाते थे। यहां विधिचंद्र मोहल्ले में किराये के मकान में रह रहे हैं। कोचिंग बंद होने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किराये का मकान खाली कर वापस गांव जाने का मन बना चुके हैं।