औरैया। हाईस्कूल में जिला टॉप करने वाली प्रियांशी की पढ़ाई की ललक का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि गांव में अच्छी शिक्षा नहीं मिली तो जिला छोड़ दिया। कक्षा आठ तक की शिक्षा जालौन के बहादुरपुर स्थित जूनियर हाई स्कूल से प्राप्त की थी। इसके बाद औरैया आ गई।
जालौन को बीहड़ क्षेत्र के रूम में जाना जाता है। कभी यहां डकैतों का राज हुआ करता था। जालौन जिले में पढ़ाई का स्तर ज्यादा अच्छा नहीं है। यह चिंता प्रियांशी को कक्षा आठ में थी। इसकी चर्चा उसने अपने स्कूल के शिक्षकों से की तो उन्होंने औरैया में पढ़ाई करने की सलाह दी।
कक्षा आठ के बाद उसने अपने पिता से जिला छोड़ औरैया में पढ़ाई करने की इच्छा जताई तो बेटी को अकेले भेजने की हिम्मत पिता सतीश चंद्र वर्मा नहीं कर जुटा पाए। उन्होंने बेटी की दादी को उसके साथ औरैया भेज दिया। यहां पर बेटी ने पढ़ाई कर पिता का नाम रोशन कर दिया।
प्रियांशी से पूछा गया कि आगे की पढ़ाई कहां करेगी तो मासूम से जवाब था जहां पापा कहेंगे। दो साल पहले वाली समस्या फिर प्रियांशी के सामने खड़ी हो गई कि 11-12 वीं की पढ़ाई कहां से की जाए।