औरैया। जिले में एक नवंबर से धान खरीद की कवायद इन दिनों सुस्त है। बड़े पैमाने पर धान क्रय केंद्रों पर डंप पड़ा है। राइस मिलों के पास एफआरके (फोर्टीफाइड राइस कर्नेल) न होने की वजह से मिल मालिक धान उठान से किनारा कर रहे हैं। ऐसे में क्रय केंद्रों से धान का उठान नहीं हो पा रहा है। वहीं, क्रय केंद्रों पर धान खरीद की गति भी सुस्त हो गई है। अब सरकारी मशीनरी ने धान के उठान पर नजर टिकाई है।
एक नवंबर को विपणन विभाग की ओर से जिले में 24 धान क्रय केंद्र खोले गए। इसमें खाद्य विभाग के जिम्मे 15 केंद्र आए। इसके साथ ही पीसीएफ के पास पांच, पीसीयू के तीन व एफसीआई को एक क्रय केंद्र की जिम्मेदारी मिली। एक माह से चल रही सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद अभी तक 563 किसानों तक पहुंच सकी है। इन किसानों 2413.68 एमटी धान खरीदा जा चुका है। शासन से मिले 24 हजार एमटी खरीद लक्ष्य के सापेक्ष 7.32 फीसदी ही खरीद हो सकी है।
क्रय केंद्रों पर 2413 एमटी धान डंप है जिसका राइस मिलों के लिए उठान नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर विपणन विभाग की ओर से राइस मिल संचालकों के साथ बैठक भी की गई जिसमें एफआरके की कमी की बात सामने आई। एफआरके न होने की वजह से मिलर धान का उठान व प्रेषण करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। हालांकि, तमाम प्रयास के बाद अनुबंधित तीन राइस मिलों को एफआरके मुहैया हुआ है। ऐसे में अब क्रय केंद्रों पर डंप धान के उठान का रास्ता साफ हो सकेगा।
फोर्टिफाइड राइस कर्नेल यानी एफआरके वे छोटे दाने होते हैं जो पोषण संबंधी कमियों को दूर करने के लिए विटामिन और खनिजों जैसे आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 से समृद्ध होते हैं। इन्हें चावल के आटे में इन पोषक तत्वों के मिश्रण को मिलाकर और फिर चावल के दाने का आकार देकर और सुखाकर बनाया जाता है। इन दाने को फिर सामान्य चावल के साथ मिलाया जाता है ताकि भोजन के साथ पोषण भी मिल सके।
राइस मिलों में धान की कुटाई में एफआरके मिलाया जाता है। जिले से अनुबंधित नौ मिलों में एफआरके की कमी है। ऐसे में मिलर धान का उठान करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। तीन मिलों को अब एफआरके मिला है। ऐसे में अब धान का उठान होगा। सुस्त पड़ी धान की खरीद को रफ्तार मिल सकेगी। -बृजेश कुमार, जिला खाद्य विपणन अधिकारी