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Auraiya News: इमरजेंसी और ओपीडी एक साथ संभाल रहे डॉक्टर, मरीज हलकान

Sat, 27 Sep 2025 07:27 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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फोटो-26एयूआरपी 05- ओपीडी के बाहर अपनी डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
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नहीं मिले आर्थो के डॉक्टर
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केस-01)
फोटो-26एयूआरपी 06- जानकारी देते सुनीत पाठक। संवाद
भाऊपुर गांव निवासी सुनीत पाठक शुक्रवार दोपहर 12 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्हें पीठ व कमर में दर्द की समस्या थी। यहां पर्चा बनवाने के बाद उन्होंने ओपीडी में इधर से उधर काफी देर तक डॉक्टर की तलाश की। बाद में उन्हें पता चला कि आर्थो के डॉक्टर ही नहीं है वह इमरजेंसी में केस देख रहे थे। ऐसे में करीब 30 मिनट तक परेशान रहने के बाद वो वापस लौट गए। उनका कहना था कि अब चिचौली मेडिकल कॉलेज जाएंगे। जहां उपचार कराएंगे।

ओपीडी छोड़कर भागना पड़ा इमरजेंसी
केस-02)
फोटो-26एयूआरपी 07- बच्चे को लेकर ओपीडी में खड़े मुनेश कुमार। संवाद
भरसेन निवासी मुनेश कुमार शुक्रवार दोपहर सवा 12 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। उन्हें अपने तीन साल के बच्चे का उपचार कराना था। ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद कुमार की ड्यूटी थी लेकिन मुनेश बच्चे को लेकर ओपीडी पहुंचते तभी इमरजेंसी में एक गंभीर मरीज आ गया। ऐसे में डॉ. विनोद कुमार इमरजेंसी चले गए। मुनेश के साथ बच्चों को लेकर आए अन्य लोग भी ओपीडी के बाहर उनके आने का इंतजार करते रहे। इमरजेंसी में मरीज का उपचार करने के बाद लौटे डॉ. विनोद कुमार ने बच्चों को देखते हुए उपचार करना शुरू किया।
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औरैया। ये केस महज बानगी हैं। ऐसे ही करीब सैकड़ों मरीज अपना इलाज कराने के लिए शुक्रवार को जिला अस्पताल आए थे लेकिन अस्पताल की ओपीडी में तैनात डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी में थे। इस वजह से उन्हें दिखाने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि इमरजेंसी में आए मरीज को देखने के बाद डॉक्टर अपने चेंबर में आकर मरीजों को फिर से देखने लगे। यह समस्या एक दिन की नहीं है। जिला अस्पताल में ये हर रोज हो रहा है। इसके पीछे की मुख्य वजह इमरजेंसी में ईएमओ की कमी है।
शहर के 50 शैया जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 22 पद स्वीकृत हैं लेकिन इसके मुकाबले महज नौ की तैनाती है। विभिन्न विशेषज्ञों के 13 पद खाली चल रहे हैं। जिस कारण से स्वास्थ्य सेवाएं संभालने में अस्पताल प्रशासन को दुश्वारी हो रही है। खास बात तो यह है कि यहां पर तैनात डॉक्टरों को ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में सेवाएं भी देनी पड़ती है। इसकी वजह से मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। तब जाकर उनका नंबर आता है। यही नहीं डाॅक्टरों को भी एक साथ दोनों ड्यूटी करने की वजह से काम का बोझ बढ़ा है। हालांकि अस्पताल प्रशासन सीमित संसाधन के जरिए इमरजेंसी से लेकर ओपीडी की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटा है।
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तीन शिफ्टों में डॉक्टर देते इमरजेंसी में सेवाएं
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दिन रात मरीजों का आना जारी रहता है। ऐसे में ओपीडी में सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को तीन शिफ्टों में इमरजेंसी में भी ड्यूटी करनी पड़ रही है। आठ-आठ घंटे की इस सेवा को अनवरत किया जा रहा है।
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इमरजेंसी में रिक्त हैं ईएमओ के चार पद
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सालों से चार पद रिक्त हैं। लगातार डिमांड भेजे जाने के बाद भी इन पदों को भरा नहीं जा सका है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500 मरीज आ रहे हैं जबकि 60-70 मरीज इमरजेंसी में भी पहुंच रहे हैं। ओपीडी के साथ डॉक्टरों को इमरजेंसी में भी सेवाएं देनी पड़ रही हैं।
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ये पद हैं रिक्त- निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट, जनरल सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, मनोरोग विशेषज्ञ, माइक्रोबायलोजिस्ट, फोरेंसिक विशेषज्ञ, ईएमओ

वर्जन
भेजी गई है डिमांड
डॉक्टरों की कमी है। सीमित संसाधनों से ही जिला अस्पताल में ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सेवाएं दी जा रही हैं। हालांकि डॉक्टरों की कमी को लेकर निदेशालय को डिमांड भेजी गई है। जल्द ही डॉक्टरों के मिलने से कमी दूर हो जाएगी।
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डॉ. अनिल कुमार गुप्ता, सीएमएस, जिला अस्पताल

फोटो-26एयूआरपी 05- ओपीडी के बाहर अपनी डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद

फोटो-26एयूआरपी 05- ओपीडी के बाहर अपनी डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद

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