संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। दिबियापुर थाना क्षेत्र में 35 साल पहले हुई जहरीली शराब से एक व्यक्ति की मौत के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम, पारुल जैन की अदालत ने फैसला सुनाया है। शनिवार को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में मुख्य आरोपी डॉ. ओमप्रकाश को दोषमुक्त कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक नवंबर 1991 को रामगढ़ निवासी शिवनाथ सिंह अपने साथी महेंद्र सिंह के साथ कन्नौज स्थित थाना सौरिख के गांव नगला खेमकरन निवासी डॉ. ओमप्रकाश की दुकान पर गए थे। आरोप था कि डॉक्टर ने उन्हें आशा पुरवा गांव में दावत का लालच देकर बुलाया और वहां शराब पिलाई। बाद में डॉक्टर ने उन्हें एक शीशी में और शराब दी। आरोप है कि यह शराब पीने से शिवनाथ सिंह की मौत हो गई थी, जबकि उनके साथी ने उल्टी करके अपनी जान बचाई थी।
इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। फैसले के दौरान अदालत ने कई अहम बिंदुओं पर गौर किया जो अभियोजन पक्ष के खिलाफ गए। मामले के मुख्य गवाह सुघर सिंह ने अदालत में मुख्य परीक्षा के दौरान तो समर्थन किया लेकिन प्रतिपरीक्षा के दौरान वह अपने बयानों से पलट गया। उसने स्वीकार किया कि आरोपी ने न तो शराब पिलाई थी और न ही कोई षड्यंत्र किया था। गवाह ने कहा कि गांव की आपसी पार्टीबंदी के कारण आरोपी को झूठा फंसाया गया है।
पुलिस ने जिस शराब की शीशी को बरामद कर लैब भेजा था, उसकी रिपोर्ट में इथाइल अल्कोहल का विष नहीं पाया गया। हालांकि, मृतक के अंगों में विष की पुष्टि हुई लेकिन शराब की शीशी में विष न मिलने से अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि मौत उसी शराब से हुई जो आरोपी ने दी थी। मामले के अन्य गवाहों ने भी घटना को अपनी आंखों से देखने से इन्कार कर दिया और इसे सुनी-सुनाई बात बताया।
शनिवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में संदेह कितना भी प्रबल क्यों न हो, वह कानूनी सबूत का स्थान नहीं ले सकता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। इस मामले में सह-अभियुक्त थाना क्षेत्र के गांव दखनई निवासी वृंदावन की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अब मुख्य आरोपी डॉ. ओमप्रकाश को बरी कर दिया गया।