औरैया। सोमवार को दीपों का पर्व दीपावली जिलेभर में पूरे उत्साह व उमंग के साथ मनाई गई। घरों, प्रतिष्ठानों व इमारतों को रंग-बिरंगी लाइट वाली झालरों से सजाया गया। शाम ढलते ही इनकी चकाचौंध करने वाली चमक से दीवाली में चार चांद लग गए। घरों व प्रतिष्ठानों पर दोपहर से ही पूजा पाठ की तैयारी शुरू हो गई। शाम को मुहूर्त के तहत गणेश लक्ष्मी व कुबेर के पूजन के साथ दीप जगमगा उठे। इस दौरान जमकर आतिशबाजी हुई और उसकी गड़गड़ाहट से पूरा माहौल उत्साहित नजर आया।
पांच दिन तक मनाए जाने वाले दीपावली पर्व की शुरूआत धनतेरस से होती है। इस दिन सोना-चांदी समेत अन्य आइटमों की खरीदारी शुभ मानी जाती है। परंपरा है कि इस दिन धातु या उससे बनी वस्तु खरीदने से सालभर बरकत रहती है। इसी दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की जयंती भी मनाई जाती है। इसके दूसरे दिन नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन गोबर का दीपक जलाकर नाली या चौखट रखने की पंरपरा है। मुख्य पर्व दीपावली सोमवार को मनाई गई।
इसके लिए घरों, दुकानों व इमारतों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। जगह-जगह घरों में रंगोली बनाई गई। शाम ढलते ही पूजा की तैयारी शुरू हो गई। बच्चों, युवाओं व युवतियों में त्योहार मनाने का उत्साह देखते ही बनता था। नए परिधानों में सजे बच्चे दीपों की जगमगाहट के बीच आतिशबाजी चलाने में व्यस्त रहे। मुहूर्त के हिसाब से लोगों ने गणेश लक्ष्मी व कुबेर भगवान का विधि-विधान से पूजन किया। कई स्थानों पर पुरोहितों ने पूजा पाठ कराई। घरों के दरवाजों पर फूलों की सजावट की गई। इसके बाद घर के हर कोने पर दीप जलाकर पूरा घर व प्रतिष्ठान रोशन किए गए।
देर रात तक आतिशबाजी की गूंज दीपावली का अहसास कराती रही। इस दौरान महिलाएं घरों में पकवान व मिष्ठान बनाने में व्यस्त रही। लोग एक दूसरे से मिलने पहुंचे और दीपावली की शुभकामनाएं दीं।