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वेंटीलेटर पर जिला अस्पताल, कैसे हो इलाज

Wed, 18 Mar 2015 01:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
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प्रतिदिन 500 मरीज, 12 डाक्टरों की फौज पर बिना कप्तान सब बेकार। कभी-कभार आने वाले सीएमएस की गैर मौजूगी में संचालित जिला अस्पताल का अनुशासन इन दिनों पूरी तरह पटरी से उतरा हुआ है।
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मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने ओपीडी समय में जिला अस्पताल का निरीक्षण किया तो दूसरों को लाइफ लाइन देने वाले जिला अस्पताल की सुविधाएं खुद वेंटीलेटर पर नजर आईं---


सामान्य चिकित्सकों ने निपटाए रोगी- औरैया। ऐसे तो जिला अस्पताल के ओपीडी सेक्शन में चार सामान्य चिकित्सक अलावा दो बाल रोग विशेषज्ञ, एक फिजीशियन, नेत्र स्पेशलिस्ट, एक सर्जन, एक आर्थोपैडिक, एक रेडियोलाजिस्ट तथा एक एनस्थिस्ट के बैठने का स्थान निर्धारित है।
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ओपीडी की लाइव कवरेज के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों की केबिनें बंद मिली। हां सामान्य चिकित्सकों के कक्ष में डा. शत्रुघ्न तथा डा. डालचंद्र रोगियों का परीक्षण कार्य करते हुए नजर आए।

 
नहीं कोई डर, हम भी रहेंगे घर- औरैया। मरीजों की लंबी कतार और डाक्टरों का इंतजार के दौर के बीच चिकित्सकों की बंद केबिनों तथा उनके गायब होने के बाबत दो शब्द जानने को जिला अस्पताल के अधीक्षक के दफ्तर पहुंची

अमर उजाला की टीम को सीएमएस का दफ्तर के दरवाजे पर ताला झूलता मिला। जानकारी करने पर कोई कर्मचारी यह तक न बता सका कि वह आएंगे कि नहीं।


मरीजों का रेला, विरोध भी झेला- औरैया। वैसे तो जिला अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह आठ से दो बजे तक निर्धारित है। पर यहां समय पर मरीज तो मिल सकते हैं, लेकिन चिकित्सक दूर दूर तक नहीं दिखाई देंगे।

जिला अस्पताल में इलाज कराने को रोगी धक्का मुक्की कर पर्चे बनवाते तो नजर आए, लेकिन चिकित्सक न होने से 80 फीसदी रोगी बिना इलाज के वापस भी लौटते दिखाई दिए।


12 में दो चिकित्सक मिले मौजूद-औरैया। जिला अस्पताल में सामान्य और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या 12 है। ओपीडी के समय दो चिकित्सक ही रोगियों को निपटाते नजर आए।

वहीं एक चिकित्सक के सेवानिवृत्त होने से केबिन बंद रही। वहीं दूसरे चिकित्सक की रात्रि सेवा होने से ओपीडी में गैर हाजिरी रही। वहीं एक अन्य चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद मिला।


चिकित्सकाें की कार्य के प्रति लापरवाही चिंताजनक है। लापरवाह चिकित्सकों को चिंहित किया गया है। ऐेसे चिकित्सकों को ओपीडी में नियति समय पर मौजूद रहने की व्हिप जारी की गई है।-डा. नवीन चंद्र मिश्रा,
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सीएमएस
                    
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