बेहतर संसाधनों के वायदे के साथ शहर से ग्राम चिचौली में स्थानांतरित जिला अस्पताल आज भी रोगियों को सहूलियत देने में नाकाम है। शासन की ओर से अपेक्षित सहयोग न मिलने से इन दिनों जिला अस्पताल में दवाइयों का अकाल है। जीवन रक्षक दवाओं की तो बात छोड़ ही दें, यहां साधारण बुखार की दवा पैरासिटामॉल भी मरीजों को नहीं मिल पा रही है।
अधूरे संसाधनों के बावजूद प्रशासनिक व शासकीय दबाव के चलते शहर में अस्थाई रूप से संचालित जिला अस्पताल को गत 10 दिसंबर 2015 को दिबियापुर रोड पर स्थित ग्राम चिचौली के नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था। नए भवन के स्थानांतरण के बाद भी जिला अस्पताल की हालत सुधरने के बजाए और बिगड़ गई।
इमरजेंसी सेवाएं व विशेषज्ञ डाक्टरों के अभाव में जिला अस्पताल की ओपीडी तो स्थानांतरण से औपचारितकता के दौर से चलाई जा रही थी। ओपीडी में इलाज कराने वाले प्रतिदिन लगभग 150 से 160 रोगियों को एक मात्र मौसमी बीमारियों की दवाओं से अस्पताल प्रशासन संतुष्ट करने को प्रयासरत था। लेकिन अब तक रोगियों को सहूलियत प्रदान करने में नाकाम रहे जिला अस्पताल की हालत और भी बदतर हो गई है।
इन दिनों दवा के अभाव में जिला अस्पताल खुद ही बद् इंतजामी के संक्रमण से गुजर रहा है। सामान्यत: जिला अस्पताल की ओपीडी में ज्यादातर रोगी मौसम जनित बीमारियों से पीड़ित होकर ही आते हैं। लेकिन मौसम जनित बीमारी में प्रमुख बुखार रोग का उपचार को जिला अस्पताल के दवा स्टोर में पैरासिटामोल के अलावा सेट्रीजिन टेबलेट पिछले एक माह से उपलब्ध नहीं हैं।