औरैया। मौसम में बदलाव बीमारियों में इजाफे की वजह बन रहा है। बच्चे और युवा ज्यादातर इसकी चपेट में आ रहे हैं। वायरल फीवर और खांसी जुकाम के मरीजों की भीड़ सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में देखी जा रही है। इधर मच्छरों का प्रकोप भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
दिन में निकल रही तेज धूप के साथ सुबह और रात को मौसम ठंडा होने के कारण मौसमी बीमारियां जैसे निमोनिया, बुखार, खांसी, जुकाम, वायरल फीवर, पीलिया, डायरिया, गलसुए, मुख्य रूप से शामिल हैं। इन बीमारियों की चपेट में बच्चे ही नहीं बल्कि युवा और बुजुर्ग भी बीमार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना इनकी संख्या 25 से 30 प्रतिशत बढ़ रही है। सप्ताह भर पूर्व इन बीमारियों की चपेट में आकर एक सैकड़ा लोग बीमार होकर मेडिकल काॅलेज पहुंच रहे थे, अब इनकी संख्या बढ़कर 300 से लेकर 350 तक पहुंच गई है। गैर सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें बच्चे और युवा शामिल हैं। उधर, मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है। कूलर और पंखों की सीधी हवा लेना भी बीमारी को दावत देने जैसा साबित हो रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि सावधानी बरतने की जरूरत है। खान-पान के साथ घर में साफ सफाई व सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।
ये हैं मौसमी बीमारियां
वायरल फीवर, निमोनिया, खांसी, जुकाम, बुखार, डायरिया, पीलिया, गलसुए आदि।
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कैसे करें बचाव
घरों पर पानी को ढक करके रखें , ताजा और स्वच्छ भोजन करें, बाजार के कटे हुए फलों को कतई न खाएं, मार्केट में बिकने वाली खाने की चीजों से परहेज करें, पंखा और कूलर की हवा सीधी ना लें और न ही बच्चों को उनके आगे सोने दें, मच्छरों से बचाव के लिए सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें।
कूलर पंखे की ना लें सीधी हवा, लगाएं मच्छरदानी
इन दिनों वायरल फीवर की चपेट में ज्यादा लोग आ रहे हैं। बच्चों की संख्या अधिक है। साफ-स्वच्छ भोजन के साथ-साथ कूलर और पंखे के सामने न बैठें और न ही सोएं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग जरूर करें। - डॉ. धर्मेंद्र कुमार, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
बच्चों को बाजार में बिकने वाली खाने-पीने की चीजें और कटे हुए फल बिल्कुल न खिलाएं, घरों पर पानी को ढक कर रखें। वायरल फीवर के साथ खांसी-जुकाम होने पर तत्काल चिकित्सकों की सलाह लें। -डॉ. शालिनी सिंह चौहान, बाल एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज