मौनी अमावस्या पर हजारों की संख्या में श्रद्घालुओं ने यमुना और पंचनद में आस्था की डुबकी लगा मनोकामना मानी। पूजन के बाद महिलाओं ने पीपल की पूजा कर घर परिवार की खुशहाली की कामना की। महिलाओं ने गरीबों को दान भी दिया।
सोमवार सुुबह से औरैया से यमुना घाट, मुरादगंज के पंचनद में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सूर्य की पहली किरण के साथ भक्तों ने पवित्र जल में डुबकी लगाई। सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद पितरों की आत्मशांति के लिए भगवान से कामना की।
इच्छानुसार गरीबों को दान भी दिया। कहते है कि आज के दिन सूर्य भगवान को सच्चे मन से जल देने पर पितरों को सीधे स्वर्ग मिलता है। घर की दरिद्रता, क्लेस आदि दूर होते है। वहीं महिलाओं ने पीपल की परिक्रमा कर संतानों की सुख समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने मौन व्रत भी रखा।
पृथ्वी पर देवों व पितरों का होता है संगम
औरैया। माघ की अमावस्या का दिन पितरों के लिए विशेष दिन है। आचार्य राम कुमार वर्मा बताते है कि पितरों से संबंधित श्राद आदि कार्य अमावस्या तक किए जाते है। वहीं बड़े यज्ञ आदि कार्य शुक्लपक्ष तक किए जाने का विधान है। आचार्य बताते है कि पुराणों में ऐसा वर्णित है कि इस दौरान सभी देवी देवता माघ की अमावस्या के दिन तीर्थ स्थलों पर आते है, जिसके साथ माघ की अवस्या को पितृदेव भी आते है। यह दिन पृथ्वी पर देवो व पितरों के संगम के रूप में देखा जाता है।
मौनी व्रत का है महत्व
औरैया। आज के दिन सच्चे मन से सूर्यदेव से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। किसी के मुंह से किसी के लिए कुछ अप्रिय न निकल जाए। इसके लिए महिलाएं मौन व्रत रखतीं हैं। आचार्य राम कुमार शास्त्री कहते है कि आज का दिन उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने वाला शक्ति से भरा दिन है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में आते है। पवित्र नदियों पर सरोवरों में आज के दिन स्नान करने से पुण्य मिलता है। मौन व्रत रखकर इंद्रियों को वश में करने का नियम है।