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Auraiya News: डिजिटल क्रांति पर चार्ज का साया, मुफ्त यूपीआई पर शुल्क की तैयारी से व्यापारी चिंतित

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बबलू बाजपेई
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औरैया। केंद्र सरकार की ओर से यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की संभावित तैयारी ने व्यापारिक जगत में खलबली मचा दी है। व्यापारिक संगठनों ने साफ किया है कि यदि डिजिटल भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क थोपा गया तो इससे कारोबार की लागत बढ़ेगी, इसका सीधा बोझ आखिरकार आम ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा।
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वर्ष 2016 में यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद से अब तक जिलेभर में 60 फीसदी तक लेन देन चल रहा है। पहले जहां कार्ड से भुगतान पर व्यापारियों को एमडीआर देना पड़ता था। वहीं, यूपीआई ने छोटे-बड़े सभी दुकानदारों और ग्राहकों के लिए लेनदेन बेहद आसान बना दिया था। हालांकि, हालिया सरकारी संकेतों से यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि एमडीआर लागू किया भी जाता है तो छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को इससे मुक्त रखा जा सकता है। यह शुल्क केवल एक निश्चित सीमा से अधिक कारोबार करने वाले बड़े व्यापारियों पर ही लागू होने की उम्मीद है।

फोटो -09- गोपालजी दुबे
व्यापार और ग्राहकों पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ
वर्ष 2016 से यूपीआई नि:शुल्क होने के कारण ही डिजिटल लेनदेन हर वर्ग तक पहुंच सका है। यदि अब इस पर शुल्क लगाया जाता है तो इससे कारोबार प्रभावित होगा और लागत बढ़ने से चीजें महंगी होंगी। - गोपालजी दुबे, युवा जिलाध्यक्ष
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फोटो -10- बबलू बाजपेई
नकद लेनदेन की ओर फिर लौट सकते हैं कारोबारी
यदि सरकार ने यूपीआई पर दो प्रतिशत तक एमडीआर लागू किया तो व्यापारी उत्पादों के दाम बढ़ाने पर मजबूर होंगे। इतना ही नहीं अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए व्यापारी दोबारा नकद भुगतान को प्राथमिकता देने लगेंगे। - राजेश बाजपेई, जिलाध्यक्ष, व्यापार मंडल

फोटो -11- बृजेंद्र गुप्ता
डिजिटल इंडिया की रफ्तार होगी प्रभावित
सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना रहा है, लेकिन शुल्क लगाने से इस अभियान को झटका लगेगा। मांग है कि यूपीआई को पूर्ववत मुफ्त ही रखा जाए ताकि व्यापार और उपभोक्ता दोनों राहत महसूस करें। - बृजेंद्र गुप्ता, जिलाध्यक्ष, उप्र व्यापार मंडल
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बबलू बाजपेई

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