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खराब दाना देख माथा पीट रहे अन्नदाता

Thu, 30 Apr 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
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चना, अरहर, सरसों के बाद बेमौसम बारिश से खराब हुई गेहूं फसल का प्रतिफल देख किसानों के आंसू तक नहीं निकल पा रहे हैं। खेतों पर कटाई में लगे में किसानों के गेहूं का कम उत्पादन तो निकल ही रहा है।  साथ ही खराब दाना उन्हें माथा पीटने को विवश कर रहा है।
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गुरुवार को ग्राम दयालपुर के खेतों पर गेहूं कटाई का जायजा लेने पर बेमौसम बारिश से गेहूं फसल की हुई असल बर्बादी का मंजर दिखाई दिया। पेश है हमारे संवादाता की खास रिपोर्ट ---




बेमौसम बारिश ने जिले के ग्राम दयालपुर के किसानों की गेहूं फसल पर कहर बरपाया है। यहां किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों को न तो बीमा कंपनी ने सहारा दिया और न ही अपनी 60 से 75 फीसदी फसल गवां चुके अन्नदाताओं से प्रशासन भी खुश नहीं है।
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पड़ताल के दौरान बेमौसम बारिश से खराब हुई चने की फसल भी गांव के खेत पर खड़ी नजर आई। एक खेत में थ्रेसर चलता हुआ दिखाई तो वहां गेहूं फसल कटाई की हकीकत जानी तो किसानों का जवाब पीड़ादायक था।


 
खेत पर गांव के दशरथ सिंह पूरे जीजान से गेहूं कटाई करवा रहे थे। बातचीत में पता चला कि दशरथ तो बटाईदार है। असल जमीन गांव के राजेंद्र माधव की है।


बटाईदार ने बताया कि 11-12 क्विटंल/बीघा औसत मानक के क्रम में चार से पांच क्विंटल के बीच उत्पादन निकल रहा है। फसल उत्पादन में खर्च की गई 6000 रुपये की लागत भी निकलती नहीं दिख रही है।

 
बदले में मिले छह क्विंटल गेहूं- चार बीघा आध-बटाई की जमीन पर नवंबर में गेहूं बोई थी। खाद, बीज और सिंचाई में 12 हजार रुपये की लागत लगाने के बाद सोचा था 25 क्विंटल गेहूं से अगली बार बलकट पर खेती करेंगे। अब बमुश्किल छह क्विंटल ही गेहूं मिलता दिख रहा है।- दशरथ बटाईदार


 
 
खाने लायक भी नहीं हुई फसल - लागत तो हमने भी लगाई, बटाईदार के साथ नुकसान हमें भी नुकसान में हैं। सरकारी मदद कोसों दूर है। बेमौसम बारिश से कम उत्पादन के साथ ही खराब दाना खाने लायक तक नहीं है। राजेंद्र माधव, किसान
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