खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में इन दिनों शिक्षामित्रों को नियुक्ति पत्र दिए जाने के नाम पर दो-दो सौ रुपये वसूले जा रहे हैं। नियुक्ति पत्र जल्दी लेने के चक्कर में शिक्षामित्र मजबूरी में दो-दो सौ रुपये दे भी रहे हैं। कई शिक्षामित्रों ने दबी जुबां से बताया कि अगर रुपये न दिए तो नियुक्ति कब मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
कांशीराम कालोनी स्थित बीआरसी परिसर में शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक बनने के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे हैं। यूं तो नियुक्ति पत्र देने के एवज में एक भी रुपया नहीं लगता, लेकिन विभागीय मनमानी शिक्षामित्रों पर हावी है।
गुरुवार को बीआरसी परिसर में 100 शिक्षामित्र नियुक्ति पत्र लेने को कतार में खड़े थे। बीआरसी परिसर में तैनात एक समन्वयक, एक दो अन्य कर्मचारी शिक्षामित्रों से दो-दो सौ रुपये लेकर उन्हें नियुक्ति पत्र दे रहे थे। जैसे ही कैमरे का फ्लैश चमका तो बीआरसी परिसर में सन्नाटा पसर गया।
दो-तीन शिक्षामित्रों ने नाम न छापे जाने के शर्त पर बताया कि बीआरसी में नियुक्ति पत्र देने के नाम पर रुपये लेने का खेल चल रहा है। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात कर्मचारियों को अगर रुपया न दिया तो नियुक्ति पत्र मिलना नामुकिन लगता है।
ऐसा नहीं कि उच्चाधिकारियों को नियुक्ति पत्र के नाम पर रुपये लेने की जानकारी नहीं है, लेकिन अधिकारी मौन साधे हैं।
:
सब कुछ है अब आधा-आधा - औरैया। शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के नियुक्ति पत्र वितरित किए जाने में सब कुछ है, अब आधा-आधा कहावत पर काम किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो जो भी रुपये वसूले जा रहे हैं, उनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से लेकर अधिकारियों तक आधा-आधा किया जा रहा है।
आपका का क्या होगा...- भले ही विभागीय अधिकारियों ने सभी शिक्षामित्रों को किसी कर्मचारी को रुपये न देने की हिदायत दी हो, लेकिन गुरुवार को बीआरसी परिसर में सभी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। अगर कोई शिक्षामित्र अपनी जुबान खोलता है तो उससे कहा जाता है कि आपका का क्या होगा जनाब, काम तो हमें ही करना है।
अगर नियुक्ति पत्र दिए जाने के नाम पर रुपयों की वसूली की जा रही है तो मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राजेश कुमार श्रीवास, बेसिक शिक्षा अधिकारी