औरैया/फफूंद। लॉकडाउन के चलते मुस्लिमों की प्रमुख इबादत की रात शब-ए-बरात पर जिले के मुस्लिमों ने जागरूकता का परिचय दिया। सभी ने घरों में रहकर ही इबादत की। इस रात को रस्म के मुताबिक अपने बुजुर्गों और माता-पिता की कब्रों पर ना जाकर मुस्लिम समुदाय ने घरों में ही रहकर सारी रात इबादत की। साथ ही मुल्क को कोरोना वायरस से निजात दिलाने की दुआएं मांगी।
मुस्लिमों के लिए गुरुवार की रात बहुत अहमियत की रात थी। इसको शब-ए-बरात के नाम से मकबूलियत हासिल है। इसका मतलब है गुनाहों से निजात की रात। इस रात तमाम मुसलमान रात भर जागकर अपने बुजुर्गों की बारगाह और अपने अजीजों की मगफिरत के लिए कब्रिस्तानों में हाजिरी देते हैं। रात भर मस्जिदों में इबादत करते हैं और रब से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं।
इस वर्ष मुस्लिम धर्म गुरुओं ने खास तौर से इस रात को भी घरों में मनाने का पैगाम दिया था। इसके चलते मुस्लिम समुदाय के तमाम लोगों ने शब-ए-बरात में अपने-अपने घरों में रहकर ही इबादत की। फफूंद स्थित ख़ानकाह आस्ताना आलिया के अलावा दरगाह बुखारी शाह, दरगाह मुहब्बत शाह, दरगाह महबूब शाह तथा दरगाह यासीन शाह के अलावा सभी क़ब्रिस्तानों व मस्जिदों में रात भर सन्नाटा रहा। रात भर दरगाह और मस्जिदों और कब्रिस्तानों के दरवाजे पूरी तरह बंद रहे। लोगों ने घर पर ही इबादत कर मुल्क की सलामती की दुआएं कीं।