एरवाकटरा (औरैया)। बरौना कला के मजरा नगला भंत में आठ दिवसीय बौद्ध कथा के सातवें दिन कथावाचक शाक्य आधार बौद्ध ने चिंचा की कथा सुनाई। इस प्रसंग में उन्होंने बताया कि श्रावस्ती की एक भिखारिन चिंचा विरोधियों के कहने पर भगवान बुद्ध पर दोष लगाती है। बाद में भूल का अहसास होने पर भगवान की शरण में चली जाती है। साथ ही विरोधियों का भंडाफोड़ करती है। चिंचा की कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा का शुभारंभ कैंसर सर्जन डॉ. नवल किशोर शाक्य व बिधूना के भाजपा विधायक प्रतिनिधि देवेश शाक्य ने तथागत बुद्ध के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कथावाचक शाक्य आधार बौद्ध ने कहा कि श्रावस्ती की भिखारिन चिंचा विरोधियों के कहने पर भगवान बुद्ध पर दोष लगाने को राजी हो जाती है।
भगवान बुद्ध पर दोष लगाने के लिए वह लगातार नौ माह तक उनके पास जाती है। नौ माह पूरे होने पर चिंचा अपने पेट में एक कठौता बांधकर पहुंची और बुद्ध से बोली कि ‘आप यहां धर्म उपदेश दे रहे हैं और उसे प्रसव वेदना सता रही है।’ इस पर बुद्ध ने कहा कि ‘सच्चाई तू जानती है या मैं जानता हूं, तीसरा और कोई नहीं जानता होगा।’ यह सुनकर चिंचा जोर-जोर से हंसने लगती है। हंसने के दौरान खांसी आने से उसके पेट में बंधा कठौता गिर जाता है। इस पर वहां उपदेश सुन रहे लोग चिंचा को मारने दौड़ते हैं पर भगवान उन्हें रोक देते हैं। बाद में चिंचा भगवान की शरण में जाती है और विरोधियों का भंडाफोड़ कर देती है।
इस दौरान अखिल भारतीय शाक्य महासभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश शाक्य के अलावा भंते मुंशी लाल शाक्य, दयाकिशन शाक्य, रामगोपाल शाक्य, राहुल सविता, ब्रजेश यादव, मनोज यादव, अजीत शाक्य, राहुल शाक्य, धर्म सिंह यादव प्रधान, पूनम शाक्य, सरोज शाक्य व जबर सिंह शाक्य आदि मौजूद रहे।