औरैया। जो व्यक्ति दूसरे के काम आता है, वह भगवान के समान होता है। यह बात आचार्य सतीश अवस्थी ने गांव करमपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन के प्रवचन में कही। आज के प्रसंग में उन्होंने अच्छे और बुरे क्षणों के बारे में विस्तार से बताया।
आचार्य सतीश अवस्थी ने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में सदैव अच्छे कार्य करता है एवं हमेशा ही मानव जाति के उत्थान के लिए सेवाओं के प्रकल्पों को जारी रखता है तो वह पृथ्वी पर रहते हुए भी नारायण के समान होता है। मनुष्य में धार्मिक प्रवृत्ति का होना जरूरी है। इससे उसके उद्धार के साथ दूसरों का उत्थान होता है। हमें मानव जीवन किस लिए मिला है, इस बात को समझना होगा। क्योंकि देवता भी पृथ्वी लोक पर जन्म लेने के लिए तरसते हैं।
व्यक्ति को जीवन पीड़ा भोगने के लिए मिला है। उसके जीवन में अच्छे-बुरे दोनों क्षण आते हैं। यदि व्यक्ति अच्छे क्षणों का सदुपयोग करता है, तो वह भवसागर से पार हो सकता है। आचार्य ने आगे बताया कि यदि हम मधुमक्खी के छते से शहद लेने का प्रयास करते हैं तो वह डंक मारकर कष्ट पहुंचाती है, लेकिन शहद प्राप्त करने की लालसा हमारे मन में जरूर रहती है। इसी प्रकार कथा का रसपान करने के लिए भी व्यक्ति को कष्ट का सामना करना पड़ता है।