औरैया। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता की आराधना की। मां स्कंदमाता की पूजा संतान सुख के लिए की जाती है। मान्यता है कि मां अपने भक्तों की रक्षा पुत्र के समान करती हैं। भगवान स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता होने को कारण इन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली, यह सिलसला देर रात तक चलता रहा। भक्तों ने विधि विधान से मां की पूजा की। इस दौरान मां के जयकारों से माहौल गूंजता रहा।
मां की कृपा से बुद्धि का विकास होता है और ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां की कृपा से पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है। स्कंदमाता की पूजा का श्रेष्ठ समय दिन का दूसरा पहर है। भक्तों ने इनकी पूजा चंपा के फूलों से की व मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाया।
भक्तों का मानना है कि जिनकों महिलाओं को संतान प्राप्त नहीं हो रही हो तो वह नवरात्रि में मां स्कंदमाता की पूजा कर सकते है। मां की पूजा करने से संतान संबंधी सभी परेशानियां समाप्त होती है। वास्तुशास्त्रत्त् के अनुसार देवी स्कंदमाता की दिशा उत्तर है। दुर्गा सप्तशती में इन्हें चेतांसी कहा है। स्कंदमाता विद्वानों व सेवकों की जननी है। मां वैष्णो कमेटी के तत्वाधान में ब्रह्मनगर में माता की सजी झांकी में लोगो ने दर्शन किए।
कमेटी के अध्यक्ष पंकज शुक्ला ने बताया कि यह झांकी हर वर्ष सजाई जाती है। हर दिन माता को अलग-अलग भोग लगाया जाता है। आज नवरात्री के पांचवें दिन माता को चंपा के फूलों से सजाया गया है। मां स्कंदमाता को मूंग से बने प्रसाद का भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया जाएगा।