नगदी संकट का असर फसल बीमा योजना पर भी पड़ा है। ज्यादातर किसानों ने फसल बीमा में रुचि नहीं दिखाई है। अब तक गैर केसीसी धारक तीन हजार 261 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है।
रबी की सीजन वाली फसलों गेहूं, सरसों, आलू और मटर का बीमा किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 765 रुपये जमा करने हैं। बीमा से फसल तबाह होने पर किसान को क्लेम मिल जाएगा। साथ ही फसल की बुवाई के लिए किसान ने कर्ज लिया है तो उसे भी चुकाया जा सकता है। नोटबंदी की समस्या से परेशान किसानों ने इस बार फसल बीमा योजना में रुचि नहीं दिखाई।
योजना के तहत किसान क्रेडिट कार्ड लेने वाले किसानों केे लिए फसल का बीमा कराना अनिवार्य है। उनके खाते से फसल बीमा के लिए बैंक प्रीमियम ले लेती है। जिले में एक लाख से अधिक किसान हैं। इनमें से 52 हजार 341 क्रेडिट कार्ड धारक हैं। इनमें से 23 हजार 512 किसानों का ही फसल बीमा हो पाया है। सभी क्रेडिट कार्ड धारकों की फसलों का बीमा नहीं हो पाया है। विभाग का दावा है कि फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है। इस तारीख तक सभी कार्डधारकों की फसलें बीमित हो जाएंगी। विभाग की मानें तो अब तक गैर केसीसी धारक तीन हजार 261 किसानों ने ही फसल बीमा कराया है।
औरैया ब्लाक के किसान राम सिंह का कहना है कि खेत की बुवाई के लिए तो रुपये हैं नहीं, फसल बीमा कहां से कराएं। धान की फसल कम दाम में बिकी। उसका भी अब तक भुगतान नहीं हो पाया है।
अंतिम तिथि तक बीमा कराने वालों की संख्या और बढ़ेगी। प्रचार प्रसार किया जा रहा है। करेंसी की समस्या कुछ हद तक दूर हो रही है। सर्वेयर अधिक से अधिक किसानों की फसलों को बीमित करने के प्रयास में लगे हैं।
विजय कुमार
उप कृषि निदेशक