बेटी की मौत पर रोते-बिलखते परिजन।
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कोतवाली क्षेत्र के बाबरपुर निवासी आरुषि का शव रविवार को कस्बे में पहुंचा। शव आते ही घर पर कोहराम मच गया। परिजनों ने सिर दर्द की बीमारी और डिप्रेशन में आकर आरुषि के आत्महत्या करने की बात कही है। बीते शनिवार कानपुर में रहकर सीपीएमटी की तैयारी कर रही आरुषि का शव कमरे में लटका मिला था।
विद्या नगर बाबरपुर निवासी श्रीप्रकाश पोरवाल की पुत्री आरुषि (17) ने बीते साल इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। उस पर डाक्टर बनकर देश सेवा करने का जुनून सवार था। करीब छह माह पहले पिता ने आरुषि की मर्जी पर उसे कोटा राजस्थान में एक कोचिंग में प्रवेश दिला दिया। वहां पर उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों ने उसका ग्वालियर आदि कई जगह इलाज करवाया। ठीक होने के बाद आरुषि फिर से तैयारी करने कोटा चली गई। लेकिन चंद दिनों बाद उसकी तबियत खराब होने पर परिजनों ने उसे वापस बुला लिया। इन हालातों के बाद भी आरुषि के सिर से डाक्टर बनने का जुनून नहीं उतरा। इस पर परिवार वालों ने उसे कोटा न भेजकर कानपुर काकादेव स्थित एक कोचिंग सेंटर में प्रवेश दिलाया। साथ ही कोचिंग के पास स्थित एक हास्टल में रूम भी दिलाया।
आरुषि के भाई राजा ने बताया कि रोज उसकी बात बहन से होती थी। शनिवार को दोपहर करीब एक बजे तो उसकी बात हुई थी। लेकिन शाम को सात बजे फोन मिलाया तो वार्डन ने उसकी आत्महत्या के बारे में बताया। पिता श्रीप्रकाश और मां कामिनी ने बताया कि पिछले बुधवार को वह घर से कानपुर गई थी। कभी सोचा भी न था कि बीमारी के चलते पढ़ाई सही ढंग से न हो पाने से आरुषि इतनी हताश हो जाएगी और मौत को अपना साथी बना लेगी। शनिवार की दोपहर करीब दो बजे आरुषि ने कानपुर स्थित एक हास्टल के कमरे में पंखे से झूलकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। दोपहर बाद सिकरोड़ी स्थित यमुना में जल प्रवाह कर दिया गया।