उरई। कालपी रोड स्थित नर्सिंगहोम में नवजात बच्चे को बदलने का आरोप लगाकर परिजनों ने हंगामा किया और डाक्टरों और स्टाफ के साथ धक्का मुक्की की। सूचना पाकर महिला थाना प्रभारी नीलेश कुमारी मय फोर्स के साथ पहुंचीं। काफी देर चली पंचायत के बाद आखिर में परिजन शांत हुए। थाना प्रभारी का कहना है कि अस्पताल में कोई दूसरा बच्चा था ही नहीं। इसलिए बच्चा बदले जाने की कोई आशंका नहीं हैं। फिलहाल परिजनों ने बच्ची को स्वीकार कर कोई तहरीर नहीं दी है।
रोहित श्रीवास्तव निवासी फैजाबाद ने शनिवार शाम अपनी पत्नी पूजा को कालपी रोड स्थित गौरी हास्पिटल में डिलेवरी के लिए भर्ती कराया था। पूजा का मायका जालौन के नारोभास्कर मोहल्ले में है। उनके पिता सुरेश श्रीवास्तव व मां शशिलता भी अस्पताल में मौजूद थीं। परिजनों को आरोप है कि देर शाम पूजा ने बेटे को जन्म दिया जिसे डॉ. सुधा गंगवार ने नर्स के माध्यम से मशीन में रखवा दिया।
कुछ देर बाद जब नर्स बच्चा लेकर लौटी तो बेटा नहीं बेटी थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बच्चा बदले जाने की बात कही तो अस्पताल के डाक्टर व स्टाफ ने अभद्रता की। इसी बात पर दोनों पक्षों में विवाद और धक्का मुक्की शुरू हो गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से महिला थाने में सूचना दी गई। कुछ ही देर में थाना प्रभारी नीलेश कुमारी मौके पर पहुंच गई।
अस्पताल की डॉक्टर गंगवार का कहना है कि पूजा को बेटी ही हुई थी। परिजनों को गलतफहमी हुई है। जबकि अस्पताल में शनिवार को और कोई डिलेवरी नही हुई है। इसलिए बच्चे को बदले जाने का सवाल ही नहीं उठता। थाना प्रभारी का कहना है कि अस्पताल में कोई दूसरा बच्चा नहीं था। दोनों पक्षों की बातचीत से साफ लग रहा था कि मामले ने अभद्रता के कारण तूल पकड़ लिया था। पूजा व उसके घरवालों ने बच्ची को अपना लिया है और कोई तहरीर भी नहीं दी है। इस संदर्भ में कोतवाल आरके सिंह का भी कहना है कि ऐसी कोई तहरीर नहीं मिली।