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कालाबाजारी पर प्रशासन पर प्रशासन सख्त, दो खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

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औरैया। डीएम के निर्देशन में उर्वरक विक्रेताओं के यहां छापेमारी अभियान जारी है। जिला कृषि सअधिकारी ने बिना लाइसेंस उर्वरक बेंचने तथा बिना लाइसेंस होने के बावजूद खाद बिक्री करने पर दो के खिलाफ सहायल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। प्रशासन की इस कार्रवाई से उर्वरक की कालाबाजारी करने वालों में हड़कंप मचा है।
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जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार ने ब्लॉक के अरियारी में बालाजी खाद भंडार का निरीक्षण किया, यहां सुबह के समय 310-310 बोरी यूरिया का स्टाक मिला, दिन में जब भौतिक सत्यापन किया गया तो 118 बोरी दुकान में उपलब्ध थी। इस तरह दुकानदार द्वारा लगभग 200 अधिक से अधिक बोरी यूरिया बिक्री की गई विक्रेता द्वारा वितरण स्टोर नहीं बनाया गया। बिक्री के यूरिया में से विक्रेता मात्र चार किसानों के छह बोरियों का पास मशीन की रसीद दिखा सका। जिस कारण से यह सत्यापन नहीं हो पाया। कालाबाजारी के कारण विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा तीन बटे सात के तहत थाना सहायल में जिलाधिकारी के निर्देश पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
जिला कृषि अधिकारी सहायल क्षेत्र में निकल रास्ते से यूरिया लादकर ले जा रहे ट्रेक्टर को रुकवाया। किसान ने बताया कि वह यह यूरिया बरु बाबू बॉर्बी से खरीदी है जब यूरिया खरीदने वाली दुकान पर गए तो यह दुकान बरु के अमर सिंह पुत्र छोटे लाल निवासी गांव वरु के मकान में संचालित है। परंतु दुकान पर कोई नाम नहीं लिखा था और तब तक विक्रेता भी दुकान बंद करके भाग गया था किसानों ने लिखित से बताया कि उन्हें खाद 300 रुपये प्रति बोरी की दर से खरीदी है। किसान खुशीलाल, नंदराम, वीरेंद्र सिंह, विनोद कुमार, कन्हैया लाल सहार क्षेत्र के आस पास गांव के निवासी हैं, जिन्होंने एनएफएल कंपनी की किसान यूरिया की 40 बोरी खरीदी थी। जब आसपास के लोगों से पता किया तो बताया गया बॉबी का असली नाम राजीव कुमार और पिता का नाम महाराज सिंह यादव निवासी दिबियापुर है। जब कार्यालय द्वारा रिकॉर्ड देखा गया तो पाया गया इनके द्वारा कोई लाइसेंस उर्वरक बिक्री के लिए नहीं लिया गया है। बिना लाइसेंस के उर्वरक बेचने के कारण इनकी विरुद्ध भी जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद थाना साहिल में एफ आई आर दर्ज कराई गई है।
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